नई दिल्ली: सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती पर कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर तीखा हमला बोला है। पार्टी ने कहा कि “जिस विचारधारा का भारत की आज़ादी की लड़ाई या संविधान निर्माण में कोई योगदान नहीं रहा, वही अब महापुरुषों की विरासत को अपने हित में इस्तेमाल करने की कोशिश कर रही है।”
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व ट्विटर) पर एक विस्तृत पोस्ट में कहा कि आज जब पूरा देश सरदार पटेल को श्रद्धांजलि दे रहा है, तब उनके और पंडित जवाहरलाल नेहरू के ऐतिहासिक संबंधों और योगदानों को याद करना भी जरूरी है।
उन्होंने लिखा,
“13 फरवरी 1949 को पंडित नेहरू ने गोधरा में सरदार पटेल की प्रतिमा का अनावरण किया था। गोधरा वही जगह थी, जहां से लौह पुरुष ने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की थी। उस अवसर पर नेहरू का भाषण आज भी दोनों नेताओं की गहरी साझेदारी और भारत निर्माण के प्रति उनकी साझा दृष्टि को दर्शाता है।”
जयराम रमेश ने नेहरू के शब्दों को उद्धृत करते हुए लिखा —
“बहुत कम लोगों के पास सरदार पटेल जैसा इतना लंबा और उल्लेखनीय सेवा-कार्य का इतिहास है। भारतीय राजनीति के उतार-चढ़ाव में वे एक मार्गदर्शक व्यक्तित्व बनकर उभरे।”
उन्होंने आगे बताया कि 19 सितंबर 1963 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने संसद भवन के पास सरदार पटेल की प्रतिमा का अनावरण किया था। उस कार्यक्रम में नेहरू भी उपस्थित थे, और पटेल की प्रतिमा पर अंकित होने वाला शिलालेख — “भारत की एकता के शिल्पकार” — स्वयं नेहरू ने चुना था।
कांग्रेस नेता ने यह भी याद दिलाया कि 31 अक्टूबर 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पटेल जन्म शताब्दी समारोह की अध्यक्षता की थी और उनके योगदान को “भारत की आत्मा में रचा-बसा” बताया था।
रमेश ने अपनी पोस्ट में सरदार पटेल द्वारा डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को लिखे एक ऐतिहासिक पत्र का उल्लेख करते हुए कहा —
“2014 के बाद, इतिहास को कुछ लोगों द्वारा जानबूझकर विकृत किया गया है। जिन राष्ट्रनिर्माताओं ने निस्वार्थ भाव से देश बनाया, आज उनकी छवि को उसी विचारधारा के लोग तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत कर रहे हैं, जिनका स्वतंत्रता संग्राम में कोई योगदान नहीं था।”
उन्होंने तीखे लहजे में कहा,
“यह वही विचारधारा है जिसने सरदार पटेल के शब्दों में, वह माहौल बनाया जिससे 30 जनवरी 1948 की त्रासदी — यानी महात्मा गांधी की हत्या — संभव हुई।”
कांग्रेस ने सरदार पटेल की विरासत को “राष्ट्र की एकता और लोकतांत्रिक मूल्यों की नींव” बताया और कहा कि उसे “राजनीतिक लाभ के लिए हथियाने” की कोशिश देश के इतिहास के साथ अन्याय है।









