शिवसेना–मनसे युति पर नवनीत राणा का सियासी वार
शिवसेना और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) की संभावित युति को लेकर अमरावती में भाजपा सांसद नवनीत राणा ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने इस गठबंधन को राजनीतिक मजबूरी करार देते हुए कहा कि “दो भाइयों का एक साथ आना व्यक्तिगत रूप से अच्छी बात हो सकती है, लेकिन राजनीति में यह मजबूरी का नतीजा है।”
नवनीत राणा ने राज ठाकरे के हालिया रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहले वे अपने भाषणों में “मेरे हिंदू भाइयों और बहनों” की बात किया करते थे, लेकिन उद्धव ठाकरे से मुलाकात के बाद अब वे “महाराष्ट्र के सभी मतदाता” कहने लगे हैं। राणा के अनुसार यह बयानबाजी में साफ विरोधाभास को दर्शाता है और जनता सब देख रही है।
आगे बोलते हुए नवनीत राणा ने शिवसेना–मनसे के चुनावी प्रदर्शन पर भी करारा तंज कसा। उन्होंने कहा कि नगरपरिषद और नगरपंचायत चुनावों में इन दोनों दलों का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा है और वे आखिरी पायदान पर पहुंच गए हैं। जो राजनीतिक दल कभी मुख्यमंत्री बनाने की ताकत रखते थे, आज उनके राजनीतिक अंत की शुरुआत हो चुकी है।
नवनीत राणा ने अपने बयान में हिंदुत्व से जुड़े मुद्दों को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि कभी भोंगे, मस्जिद और हनुमान चालीसा जैसे मुद्दों को जोर-शोर से उठाने वाले नेता अब इन विषयों पर चुप क्यों हैं। उन्होंने दावा किया कि जनता इन सवालों का जवाब आगामी चुनावों में देगी।
महानगरपालिका चुनावों को लेकर नवनीत राणा ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि इस बार राज्य के शहरी निकाय चुनावों में सिर्फ भाजपा और भगवा झंडा ही लहराएगा। उनके अनुसार, जनता का भरोसा भाजपा की नीतियों और नेतृत्व पर है और विपक्षी दलों की युति से जमीनी हकीकत नहीं बदलने वाली।











