नागपुर:महाराष्ट्र में बिजली दरों में लगातार हो रही बढ़ोतरी से आम उपभोक्ताओं और उद्योगों में नाराज़गी बढ़ती जा रही है। मार्च 2025 में जनसुनवाई के बाद MSEDCL ने बिजली दरों और फिक्स्ड चार्ज में वृद्धि की गयी, साथ ही सौर ऊर्जा से मिलने वाले लाभ भी कम कर दिए गए। इसके बाद जून 2025 में बिना उचित जनसुनवाई के पुनर्विचार आदेश जारी कर दरें फिर से बढ़ा दी गईं।
इस फैसले को ग्राहकों और उद्योगों ने बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी गयी, जहां 3 नवंबर 2025 को पुनर्विचार आदेश को रद्द कर दिया गया। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी एकतरफा दरवृद्धि पर रोक लगाते हुए सार्वजनिक परामर्श प्रक्रिया का पालन करने के निर्देश जारी कर दिए। इसके बावजूद, रद्द किए गए आदेशों के आधार पर बढ़े हुए बिजली बिल भेजे जाने का आरोप लगाया जा रहा है।












