जमशेदपुर। भारत के खनिज और धातु क्षेत्र में नवाचार और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (CSIR–NML) और मिनरल एक्सप्लोरेशन एंड कंसल्टेंसी लिमिटेड (MECL) ने एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह साझेदारी देश में महत्वपूर्ण खनिजों के अनुसंधान, विकास और तकनीकी नवाचार को नई दिशा देने के उद्देश्य से की गई है।
मंगलवार को हुए इस समझौते पर एमईसीएल के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक इंद्र देव नारायण और सीएसआईआर-एनएमएल के निदेशक डॉ. संदीप घोष चौधरी ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर दोनों संस्थानों के वरिष्ठ वैज्ञानिक और अधिकारी भी उपस्थित रहे।
इस समझौते के तहत दोनों संस्थान मिलकर खनिज लाभकारीकरण (mineral beneficiation), धातु निष्कर्षण (metal extraction), तकनीकी मूल्यांकन (technical gap assessment) और विश्लेषणात्मक एवं कार्यान्वयन सहायता जैसे क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान करेंगे।
बयान में बताया गया कि यह सहयोग न केवल महत्वपूर्ण खनिजों और धातुओं के अनुसंधान को गति देगा, बल्कि “सतत और आत्मनिर्भर खनिज विकास” के केंद्र सरकार के दृष्टिकोण के अनुरूप भी है। इससे दोनों संस्थानों के बीच ज्ञान, तकनीकी विशेषज्ञता और प्रशिक्षण के आदान-प्रदान को प्रोत्साहन मिलेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह साझेदारी भारत को “Critical Minerals Mission” की दिशा में और आगे ले जाएगी — जिससे देश को कोबाल्ट, लिथियम, निकेल, टंगस्टन जैसे रणनीतिक खनिजों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी।
सीएसआईआर-एनएमएल के अनुसार, यह पहल “Center of Excellence on Critical Minerals and Metals” के तहत खनिज विज्ञान में उत्कृष्टता और नवाचार को मजबूत करेगी। दोनों संस्थानों की संयुक्त कार्ययोजना देश की औद्योगिक जरूरतों और भविष्य की हरित ऊर्जा परियोजनाओं के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी।






