मुंबई। महाराष्ट्र सरकार द्वारा मुस्लिम समुदाय के लिए शिक्षा और नौकरियों में पांच प्रतिशत आरक्षण रद्द करने के फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देते हुए याचिका दायर की गई है। वकील सैयद एजाज अब्बास नकवी द्वारा दायर याचिका में महाराष्ट्र के सामाजिक न्याय और विशेष सहायता विभाग द्वारा 17 फरवरी को जारी सरकारी आदेश को संविधान के उल्लंघन और मुस्लिम समुदाय के हितों के विरुद्ध करार दिया गया है। याचिका में कहा गया है, प्रतिवादी (महाराष्ट्र सरकार) अल्पसंख्यक समुदाय यानी मुस्लिम समुदाय के लोगों के साथ भेदभाव कर रही है। यह संविधान में निहित मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
इसमें यह भी कहा गया कि आरक्षण रद्द करने के सरकार के फैसले का कोई तार्किक आधार नहीं है। उच्च न्यायालय में याचिका पर सुनवाई अगले सप्ताह हो सकती है। याचिकाकर्ता के वकील नितिन सातपुते ने कहा कि याचिका में उच्च न्यायालय से सरकार द्वारा 17 फरवरी को जारी प्रस्ताव को रद्द करने और अंतरिम आदेश के माध्यम से याचिका की सुनवाई तक इसके कार्यान्वयन पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया है।
याचिका के अनुसार, जुलाई 2014 में तत्कालीन कांग्रेस-राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) सरकार ने शिक्षा और नौकरियों में मराठा समुदाय के लिए 16 प्रतिशत और मुसलमानों के लिए पांच प्रतिशत आरक्षण की घोषणा की थी, जिससे उन्हें सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग की श्रेणी में रखा गया था।









