मुंबई। मुंबई के पवई में बच्चों को बंधक बनाने वाले आरोपी रोहित आर्य की मौत के बाद मामला अब राजनीतिक रंग लेने लगा है। महाराष्ट्र के पूर्व स्कूल शिक्षा मंत्री दीपक केसरकर ने खुलासा किया है कि उन्होंने आर्य को व्यक्तिगत तौर पर आर्थिक मदद दी थी, लेकिन यह विभागीय भुगतान नहीं था। उन्होंने स्पष्ट किया कि आर्य की परियोजना से जुड़ा भुगतान सरकार का विषय था, न कि निजी सहायता का मामला।
बंधक कांड की पृष्ठभूमि
बुधवार को पवई इलाके के एक स्टूडियो में 17 बच्चों और दो अन्य लोगों को बंदी बना लिया गया था। पुलिस ने घेराबंदी कर सभी को सुरक्षित मुक्त कराया, लेकिन मुठभेड़ के दौरान गोली लगने से रोहित आर्य (50) घायल हुआ और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
आर्य कभी शिक्षा विभाग की एक प्रमुख पहल ‘लेट्स चेंज’ का परियोजना निदेशक रह चुका था। इस परियोजना के तहत स्कूली बच्चों को ‘स्वच्छता मॉनिटर’ बनाया गया था ताकि वे सार्वजनिक स्थलों पर सफाई और अनुशासन को लेकर जनजागरूकता फैला सकें।
केसरकर का बयान — “मानवता के नाते दी थी मदद”
मीडिया से बातचीत में दीपक केसरकर ने कहा,
“मैंने आर्य से मुलाकात की थी और उसकी आर्थिक परेशानी को देखते हुए शिष्टाचारवश एक चेक के माध्यम से सहायता दी थी। यह विभागीय भुगतान नहीं था। विभाग ने उसकी वेबसाइट से छात्रों से पैसे लेने पर आपत्ति जताई थी और स्पष्टीकरण मांगा था।”
उन्होंने कहा कि आर्य ने सरकार से अपने बकाये की मांग के लिए पिछले वर्ष पुणे में धरना भी दिया था।
परियोजना और विवाद
शिक्षा विभाग के 25 जनवरी 2024 के आदेश के अनुसार, ‘लेट्स चेंज’ परियोजना के तहत
- 20 जुलाई से 2 अक्टूबर 2023 तक ‘स्वच्छता मॉनिटर’ पहल चलाई गई,
- इसमें 64,000 स्कूलों और करीब 59 लाख छात्रों ने भाग लिया,
- और इसके दूसरे चरण के लिए 2 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे।
आर्य का दावा था कि परियोजना पूरी होने के बावजूद उसे भुगतान नहीं मिला। उसकी पत्नी अंजलि आर्य ने भी आरोप लगाया था कि सरकार ने दो करोड़ रुपये मंजूर किए थे, मगर भुगतान रोका गया।
वीडियो में आर्य का बयान — “बस बात करना चाहता हूं”
घटना से पहले सोशल मीडिया पर जारी वीडियो में आर्य ने कहा था कि उसने “एक योजना के तहत बच्चों को रोका है” और वह केवल “कुछ सवाल पूछना” चाहता है। इस बयान ने पूरे मामले को रहस्यमय बना दिया।
पुलिस जांच जारी
पवई पुलिस इस पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि आर्य के मानसिक और आर्थिक दबाव से जुड़े पहलुओं की भी जांच होगी। वहीं, पूर्व मंत्री केसरकर के बयान ने इस मामले में प्रशासनिक जवाबदेही पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।









