मोकामा: बिहार में विधानसभा चुनाव के बीच राजनीति और अपराध का गठजोड़ एक बार फिर सुर्खियों में है। पटना से लगभग 100 किलोमीटर दूर मोकामा में गुरुवार को हुए खूनी संघर्ष ने पूरे प्रदेश की सियासत को हिला दिया।
जन सुराज पार्टी के स्थानीय उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी के समर्थक और नेता बने दुलारचंद यादव की गोली मारकर हत्या कर दी गई। घटना के बाद इलाके में तनाव, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और जातीय गोलबंदी तेज हो गई है।
चुनावी रैली के दौरान भड़की हिंसा
पुलिस के अनुसार, घटना उस समय हुई जब दुलारचंद यादव मोकामा विधानसभा क्षेत्र में चुनाव प्रचार में शामिल थे। इसी दौरान जद(यू) समर्थकों और जन सुराज कार्यकर्ताओं के बीच भिड़ंत हो गई।
हंगामा इतना बढ़ा कि फायरिंग शुरू हो गई। पुलिस के मुताबिक, यादव को पहले गोली मारी गई और फिर उन्हें एक वाहन से कुचल दिया गया।
पटना ग्रामीण के एसपी विक्रम सिहाग ने बताया,
“प्रारंभिक जांच में पता चला है कि यादव को गोली लगी थी, लेकिन उनकी मौत वाहन से कुचलने से हुई। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से स्थिति साफ होगी।”
जन सुराज का आरोप: “हमारे उम्मीदवार पर हमला, यादव को कुचलकर मारा गया”
जन सुराज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने इसे “लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला” बताते हुए कहा —
“हमारे उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी के काफिले पर हमला हुआ। बीच-बचाव करने पहुंचे दुलारचंद यादव की हत्या कर दी गई। यह राज्य में फैले भय और ‘जंगलराज’ का प्रमाण है।”
पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने कहा कि उनकी टीम घटनास्थल पर है और “पूरी सच्चाई सामने लाने का काम जारी है।”
जद(यू) प्रत्याशी अनंत सिंह ने कहा — “साजिश मुझे फंसाने की”
वहीं, जद(यू) उम्मीदवार और बाहुबली नेता अनंत सिंह ने सभी आरोपों से इनकार करते हुए कहा,
“मैं घटना स्थल से काफी दूर था। यह सूरज भान की साजिश है ताकि मुझे बदनाम किया जा सके।”
मोकामा में तनाव, प्रशासन अलर्ट
हत्या के बाद मोकामा और आसपास के क्षेत्रों में माहौल तनावपूर्ण है। भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और संभावित जातीय टकराव को देखते हुए संवेदनशील इलाकों में फ्लैग मार्च किया जा रहा है।
पटना जिला प्रशासन ने कहा कि आरोपियों की तलाश में छापेमारी चल रही है।
कौन थे दुलारचंद यादव?
मोकामा-टाल क्षेत्र में “टाल का बादशाह” कहे जाने वाले दुलारचंद यादव कभी लालू प्रसाद यादव के बेहद करीबी माने जाते थे।
वे आरजेडी के मजबूत जमीनी नेता रहे, लेकिन 2025 के चुनाव में उन्होंने प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी का रुख कर लिया था। उनकी छवि समाजवादी जन नेता के रूप में रही। दुलारचंद यादव जातीय समीकरणों में महत्वपूर्ण माने जाते थे और जन सुराज उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी के लिए उन्होंने हाल ही में एक प्रचार गीत भी रिकॉर्ड करवाया था।
राजनीतिक बयानबाजी तेज
आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा —
“बिहार में अब अपराधी नहीं, सियासी ठेकेदार गोलियां चला रहे हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा को बताना चाहिए कि यह ‘सुशासन’ है या फिर ‘खुला जंगलराज’?”
मोकामा में दुलारचंद यादव की हत्या सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि बिहार की चुनावी राजनीति में जातीय प्रभुत्व और बाहुबल की वापसी का संकेत है। बढ़ते जातीय अपराधों, बाहुबलियों के खुले समर्थन और स्थानीय गठबंधनों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बिहार में 2025 का चुनाव सिर्फ विचारधारा नहीं, बल्कि “जाति, शक्ति और नियंत्रण” की लड़ाई बन चुका है।
मोकामा की यह वारदात न केवल एक राजनीतिक हत्या है बल्कि यह बिहार के चुनावी लोकतंत्र पर एक गंभीर सवाल भी खड़ा करती है —
“क्या बिहार फिर उसी पुराने दौर की ओर लौट चुका है, जहाँ बंदूकें चुनावी नारों से ज्यादा प्रभावशाली थीं?”









