मुंबई। महाराष्ट्र में ‘ऑपरेशन टाइगर’ की खबरों से राजनीति गरमा गई है। वहीं उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शुक्रवार को उद्धव ठाकरे नीत शिवसेना (उबाठा) के सांसदों के उनकी पार्टी में शामिल होने की खबरों को खारिज करते हुए इन्हें निराधार बताया। शिवसेना प्रमुख शिंदे ने एक बयान में कहा कि उनके और शिवसेना (उबाठा) के सांसदों के बीच कथित बैठक की खबर भ्रामक है।
उन्होंने कहा, “अफवाह फैलाई जा रही है कि शिवसेना (उबाठा) के सांसद दल-बदल कर शिवसेना में शामिल हो जाएंगे। यह पूरी तरह निराधार है और इसका उद्देश्य केवल सनसनी फैलाना है।” शिंदे का यह बयान उन खबरों के बीच आया है, जिनमें दावा किया गया था कि उन्होंने ठाणे में शिवसेना (उबाठा) के सांसदों के साथ एक गुप्त बैठक की थी। यह भी चर्चा थी कि शिवसेना (उबाठा) का एक धड़ा टूटकर शिंदे गुट में शामिल हो सकता है। शिवसेना (उबाठा) के कुल 10 सांसद हैं, जिनमें लोकसभा के नौ और राज्यसभा का एक सदस्य शामिल है।
साल 2022 में एकनाथ शिंदे ने बाल ठाकरे द्वारा स्थापित शिवसेना के भीतर बगावत की अगुवाई की और विधायकों के एक समूह के साथ उद्धव ठाकरे के नेतृत्व से अलग हो गए। इसके बाद उन्हें पार्टी का नाम और उसका चुनाव चिह्न ‘धनुष-बाण’ भी मिल गया। जहाँ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना राज्य में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन की सहयोगी है, वहीं उद्धव ठाकरे की शिवसेना (उबाठा) विपक्षी गठबंधन महा विकास अघाड़ी का हिस्सा है।
वहीं शिवसेना (शिंदे गुट) के सांसद नरेश म्हस्के ने उद्धव ठाकरे गुट पर तीखा हमला बोला है। म्हस्के ने स्पष्ट किया कि शिवसेना (यूबीटी) सांसदों के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मिलने या पार्टी छोड़ने की खबर पूरी तरह निराधार और मनगढ़ंत है। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार मिल रही चुनावी हार और नेतृत्व की विफलता से ध्यान भटकाने के लिए शिवसेना (यूबीटी) नेता खुद ऐसी खबरें मीडिया में प्लांट कर रहे हैं।
नरेश म्हस्के ने शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि राउत के कारनामों की वजह से ही आज यूबीटी पार्टी मृतप्राय अवस्था में पहुँच गई है। उन्होंने दावा किया कि आदित्य ठाकरे और संजय राउत के बीच शीतयुद्ध चल रहा है। म्हस्के ने तंज कसते हुए कहा कि उद्धव ठाकरे अब खत्म हो रहे हैं, जबकि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना देश की अग्रणी क्षेत्रीय पार्टी बन चुकी है।








