चिमूर की करिश्मा ने एमपीएससी परीक्षा में शानदार सफलता हासिल की
चंद्रपुर, संवाददाता:एक छोटे से गाँव से आनेवाली करिश्मा ने बड़ा सपना देखा और उसे पूरा करने के लिए निकल पड़ी। सैकड़ों दिक्कतों का सामना करने के बाद व परिवार की आर्थिक स्थिति उन्हें हौसलों को ढीला नहीं सकी। मेहनत रंग लायी। करिश्मा ने अनुसूचित जाति वर्ग में राज्य में बाजी मारी। लगातार मेहनत व प्रयास के चलते करिश्मा ने हर दिक्कतों को मात देकर सफलता हासिल की। सभी वर्गों से अभिनंदन के फूलों की बरसात की जा रही है।
चिमूर तहसील के वडसी गाँव के एक खेतिहर मज़दूर की बेटी के रूप में काम करने वाली करिश्मा अनिरुद्ध मेश्राम ने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) की परीक्षा में शानदार सफलता हासिल की है। करिश्मा का चयन सहायक वन संरक्षक के पद के लिए हुआ है। उन्होंने राज्य में अनुसूचित जाति की महिलाओं में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। इस उल्लेखनीय सफलता के लिए वडसी गाँव और पूरे चिमूर तहसील से बधाइयों का तांता लगा हुआ है।
अनिरुद्ध मेश्राम, जो पहले खेतिहर मज़दूर थे, ने अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए छोटा-मोटा व्यवसाय भी शुरू किया। उनके बच्चों को उनकी मेहनत का फल मिला। पिछले साल उनके बड़े बेटे उमेश ने एमपीएससी परीक्षा पास की और पुलिस सब-इंस्पेक्टर बन गए।
अब उनकी बेटी का भी सहायक वन संरक्षक के पद पर चयन हो गया है।
करिश्मा ने प्रारंभिक शिक्षा वडसी ज़िला परिषद स्कूल, माध्यमिक शिक्षा गोंडेदा गुरदेव माध्यमिक विद्यालय और बी.एस.सी. की शिक्षा ज्ञानेश कॉलेज, नवगाँव से पूरी। उसके बाद, उन्होंने नागपुर यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की और फिर पुणे में स्पर्धा परीक्षा की तैयारी की। करिश्मा ने अनुसूचित जाति में राज्य योग्यता परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया।
होना चाहिए पहल
छोटे-छोटे गाँवों में प्रतिभाएं छुपी हुई हैं परंतु सुविधा के अभाव में प्रतिभाओं के प्रयास अधूरे रह जाते हैं। प्रशासन द्वारा छोटे गाँव में स्पर्धात्मक परीक्षाओं की तैयारी हेतु केंद्र का निर्माण करने की ज़रूरत है। साथ ही ऐसे गाँवों में एक लाइब्रेरी बनाना चाहिए जहाँ स्पर्धात्मक परीक्षाओं की किताबें उपलब्ध हों।











