नई दिल्ली। केंद्र सरकार महिला आरक्षण 2029 से पहले लागू करने की तैयारी में है, जिसके तहत परिसीमन आयोग के जरिए सीटों की संख्या बढ़ाई जा सकती है और लोकसभा की सीटों का विस्तार होगा। जानकारी के अनुसार, इन मुद्दों पर फिलहाल विचार-विमर्श जारी है। वहीं इस प्रक्रिया के बाद लोकसभा की सीटें लगभग दोगुनी होने की संभावना है। कई राज्यों समेत महाराष्ट्र की सीटों में भी बढ़ोतरी देखी जा सकती है।
केंद्र सरकार 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिला आरक्षण लागू करने की दिशा में काम कर रही है। सूत्रों के अनुसार लोकसभा की कुल सीटों को 543 से बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। इसमें एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित रखने की योजना है। इस प्रस्ताव का सीधा असर महाराष्ट्र पर भी देखने को मिल सकता है। मौजूदा समय में राज्य में 48 लोकसभा सीटें हैं, जो परिसीमन के बाद बढ़कर 72 हो सकती हैं। यानी राज्य में कुल 24 नई सीटों का इजाफा संभव है।
महाराष्ट्र का संसदीय इतिहास
महाराष्ट्र में लोकसभा सीटों की संख्या समय के साथ बढ़ती आई है। देश के सबसे पहले लोकसभा चुनाव की बात करें जो कि 1952 में हुए थे, तब महाराष्ट्र (तब बॉम्बे नाम से जाना जाता था) राज्य में कुल 45 सीटें थीं। वहीं 1976 की परिसीमन समिति के बाद 1977 के चुनाव में यह संख्या बढ़कर 48 हो गई, जो अभी तक कायम है।
प्रमुख संसदीय क्षेत्र (सूची 13 के अनुसार):
महाराष्ट्र के संसदीय क्षेत्रों में राजापुर, रत्नागिरी, कोलाबा, बॉम्बे साउथ, बॉम्बे साउथ सेंट्रल, बॉम्बे नॉर्थ सेंट्रल, बॉम्बे नॉर्थ ईस्ट, बॉम्बे नॉर्थ वेस्ट और बॉम्बे नॉर्थ शामिल हैं। इसके अलावा ठाणे, दहानू (ST), नासिक, मालेगांव (ST), धुले, नंदुरबार (ST), एरंडोल, जलगांव, बुलढाणा (SC), अकोला और वाशिम भी इस सूची का हिस्सा हैं।
इसी क्रम में अमरावती, रामटेक, नागपुर, भंडारा, चिमूर, चंद्रपुर, वर्धा, यवतमाल, हिंगोली, नांदेड़, परभणी, जालना, औरंगाबाद, बीड़, लातूर और उस्मानाबाद (SC) शामिल हैं। आगे सोलापुर, पंढरपुर (SC), अहमदनगर, खेड़, पुणे, बारामती, सतारा, कराड, सांगली, इचलकरंजी और कोल्हापुर भी महाराष्ट्र के संसदीय क्षेत्रों में शामिल हैं।
देशभर में संभावित बदलाव
सूत्रों के मुताबिक नए प्रस्ताव में सीटों की संख्या करीब 50 प्रतिशत तक बढ़ाई जा सकती है। इसका सबसे ज्यादा फायदा उत्तर भारत के बड़े राज्यों को मिल सकता है। उदाहरण के तौर पर उत्तर प्रदेश की सीटें 80 से बढ़कर 120 तक हो सकती हैं।
परिसीमन और जनगणना का कनेक्शन
अनुमान है कि अगली जनगणना 1 मार्च 2027 तक पूरी हो सकती है। इसके बाद परिसीमन आयोग का गठन होगा और प्रक्रिया पूरी होने में करीब 3 साल लग सकते हैं। ऐसे में यदि कानून में बदलाव नहीं हुआ तो यह प्रक्रिया 2029 चुनाव के बाद भी लागू हो सकती है। सूत्रों के अनुसार सरकार इस प्रक्रिया में देरी से बचने के लिए 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बना सकती है। हालांकि विपक्ष ने जनगणना और परिसीमन को जोड़ने पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि इससे महिला आरक्षण लागू होने में देरी हो सकती है।











