झांसी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने झांसी में गुरुवार को कहा कि आजादी के बाद कुछ लोगों ने धर्मनिरपेक्षता की भावना को विकृत कर दिया और उन लोगों को ‘सच्चा धर्मनिरपेक्ष’ माना गया जो भारतीय परंपराओं और मूल्यों का अपमान करते थे। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद धर्मनिरपेक्ष दिखने की होड़ मच गई और लोग इसे अपनी सुविधा के अनुसार परिभाषित करने लगे। जो लोग भारतीय संस्कृति और मूल्यों का मजाक उड़ाते थे, उन्हें ज्यादा धर्मनिरपेक्ष माना जाता था। इस मानसिकता ने देश में अलगाव और उग्रवाद को जन्म दिया।
मुख्यमंत्री ने शिक्षा के माध्यम से राष्ट्रवाद और संस्कृति की भावना जगाने वाले संगठनों में विद्या भारती की सराहना की। उन्होंने तुलसीदास के शब्दों का हवाला देते हुए कहा, “जिनके पास आस्था है, उन्हें ज्ञान भी प्राप्त होगा। जिस व्यक्ति में भारत के प्रति आस्था और संस्कृति का सम्मान नहीं है, उससे यह कैसे उम्मीद की जा सकती है कि वह राष्ट्र को समझे या इसके विकास में योगदान दे?”
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि साल 1947 की सरकार भारतीय लोकाचार के अनुरूप शिक्षा प्रणाली बनाने में विफल रही, लेकिन 1952 में गोरखपुर में सरस्वती शिशु मंदिर की स्थापना ने इस कमी को दूर किया। उन्होंने बताया कि उस एक विद्यालय से विद्या भारती का राष्ट्रव्यापी नेटवर्क विकसित हुआ, जो अब 25 हजार से अधिक शिक्षा केंद्रों के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों को मजबूत कर रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्या भारती के शिक्षा केंद्र पीढ़ियों को भारतीय मूल्यों पर गर्व करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “यह गर्व की बात है कि आज विद्या भारती पूरे भारत में 25 हजार से अधिक औपचारिक और अनौपचारिक शिक्षा केंद्र चला रही है। यह आंदोलन नानाजी देशमुख द्वारा 1952 में गोरखपुर से शुरू किया गया था।”
सीएम योगी ने बुंदेलखंड की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि झांसी और ओरछा क्षेत्र भगवान राम के प्रति अपनी अटूट भक्ति और तुलसीदास जैसे संतों के योगदान के लिए जाना जाता है। उन्होंने झांसी की रानी लक्ष्मीबाई और महान हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद की वीरता और उपलब्धियों की भी सराहना की।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने धर्मनिरपेक्षता की विकृत व्याख्या, भारतीय संस्कृति के अपमान पर चिंता और विद्या भारती के शिक्षा आंदोलन के योगदान को उजागर करते हुए राष्ट्रभक्ति और संस्कृति की आवश्यकता पर जोर दिया।











