नई दिल्ली। निर्वाचन आयोग ने राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को स्पष्ट हिदायत दी है कि बिहार विधानसभा चुनाव में ‘डीपफेक’ या सूचना को तोड़-मरोड़कर पेश करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित सामग्री का दुरुपयोग नहीं किया जाएगा। यह चेतावनी ऐसे समय में जारी की गई है जब बिहार में आदर्श आचार संहिता लागू है और शुक्रवार को पहले चरण के चुनाव की अधिसूचना जारी होने वाली है। राज्य में मतदान 6 और 11 नवंबर को दो चरणों में होगा और मतगणना 14 नवंबर को होगी।
निर्वाचन आयोग ने अपने बयान में कहा कि आदर्श आचार संहिता के प्रावधान इंटरनेट और सोशल मीडिया पर डाले जाने वाले सभी प्रचार सामग्री पर लागू होते हैं। आयोग ने स्पष्ट किया कि किसी भी दल या उम्मीदवार की आलोचना केवल उनके नीतिगत रुख, कार्यक्रम, कार्य और पिछले रिकॉर्ड तक ही सीमित रहनी चाहिए। साथ ही, यदि कोई दल अपने प्रचार में एआई-जनित, डिजिटल रूप से परिवर्तित या सिंथेटिक सामग्री का उपयोग करता है, तो उसे स्पष्ट करना होगा कि उसकी सामग्री “एआई जेनरेटेड”, “डिजिटली एन्हैंस्ड” या “सिंथेटिक कंटेंट” से संबंधित है।
आयोग ने चेतावनी दी है कि अनुमानित या अपुष्ट आरोपों पर आधारित आलोचना, या तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करना, निर्वाचन प्रक्रिया की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकता है। विशेष रूप से सोशल मीडिया पोस्ट और डिजिटल प्रचार सामग्री पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है, ताकि चुनावी माहौल दूषित न हो। उल्लंघन की स्थिति में संबंधित दल या उम्मीदवार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
निर्वाचन आयोग ने याद दिलाया कि पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान भी एआई के दुरुपयोग और गलत सूचना के प्रसार को रोकने के लिए पार्टियों के लिए दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। चुनाव प्रचार में एआई तकनीक के बढ़ते उपयोग और मतदाताओं की राय को प्रभावित करने की क्षमता के मद्देनजर, आयोग ने इस साल जनवरी में राजनीतिक दलों को एक परामर्श जारी किया था। इस परामर्श के तहत, पार्टियों को एआई प्रौद्योगिकियों द्वारा तैयार या व्यापक रूप से परिवर्तित किसी भी छवि, वीडियो, ऑडियो या अन्य सामग्री को स्पष्ट रूप से “एआई-जेनरेटेड”, “डिजिटली एन्हांस्ड” या “सिंथेटिक सामग्री” के लेबल के साथ प्रस्तुत करना अनिवार्य है।
निर्वाचन आयोग ने यह भी कहा कि राजनीतिक दलों को अपने प्रचार सामग्री के प्रसार के दौरान स्पष्ट करना होगा कि कहीं भी सिंथेटिक सामग्री का उपयोग किया गया है। इस कदम का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता, निष्पक्षता और मतदाताओं की जागरूकता सुनिश्चित करना है।











