रामनाथपुरम (तमिलनाडु)। तमिलनाडु के स्वतंत्रता सेनानी और सामाजिक न्याय के प्रबल समर्थक पासुम्पोन मुथुरामलिंगा थेवर की 118वीं जयंती और 63वीं गुरु पूजा पर गुरुवार को देशभर से हजारों श्रद्धालु पासुम्पोन पहुँचे। इस अवसर पर भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने उनके स्मारक पर पुष्प अर्पित कर नमन किया।
राधाकृष्णन बोले – थेवर सच्चे देशभक्त और अध्यात्मनिष्ठ नेता थे
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने सोशल मीडिया मंच X (पूर्व में ट्विटर) पर श्रद्धांजलि देते हुए लिखा कि मुथुरामलिंगा थेवर ‘‘एक महान योद्धा, निडर सेनानी और पूजनीय संत’’ थे जिन्होंने अपना जीवन राष्ट्रसेवा के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा,
“नेताजी सुभाष चंद्र बोस के अनुयायी के रूप में थेवर ने अपने विचारों में साहस, त्याग और देशभक्ति की मिसाल पेश की।”
राधाकृष्णन ने कहा कि थेवर ने राष्ट्रवाद और आध्यात्मिकता को जीवन के दो प्रमुख स्तंभ माना और वे सभी धर्मों और समुदायों में समानता के प्रतीक रहे। उन्होंने गरीबों के कल्याण के लिए अपनी भूमि तक दान में दे दी थी।
मुख्यमंत्री स्टालिन ने किया नमन, बताया—‘जनता के नेता, अत्याचारों के विरुद्ध योद्धा’
मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने पासुम्पोन स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की और कहा कि थेवर ने दमनकारी कानूनों से जनता को मुक्ति दिलाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के विश्वासपात्र के रूप में स्वतंत्रता संग्राम में योगदान दिया और सामाजिक न्याय की अलख जगाई।
राजनीतिक एकता और भारी सुरक्षा व्यवस्था
इस अवसर पर विपक्ष के नेता ई. के. पलानीस्वामी सहित कई अन्य दलों के नेताओं ने भी श्रद्धांजलि दी। आयोजन स्थल और आसपास के इलाकों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। पुलिस सूत्रों के अनुसार, मदुरै में 3,000 और पासुम्पोन में 8,000 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी ताकि श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित किया जा सके।
थेवर की विरासत आज भी प्रेरणा
दक्षिण तमिलनाडु में पूजनीय माने जाने वाले मुथुरामलिंगा थेवर का जन्म 30 अक्टूबर 1908 को हुआ था और 30 अक्टूबर 1963 को उनका निधन हो गया था। इसीलिए हर वर्ष उनकी जयंती और गुरु पूजा एक ही दिन मनाई जाती है। थेवर को समाज सुधार, राष्ट्रभक्ति और समानता के प्रतीक के रूप में आज भी सम्मान के साथ याद किया जाता है।











