नागपुर में ऑटो रिक्शा चालकों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई। ऑटो रिक्शा चालक-मालक संघटना कृती समिति महाराष्ट्र के महासचिव विलास भालेकर के नेतृत्व में यह आंदोलन आयोजित किया गया, जिसमें सैकड़ों चालक शामिल हुए।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार और परिवहन विभाग समय-समय पर नए नियम लागू कर ऑटो रिक्शा चालकों पर अनावश्यक दबाव बना रहे हैं। उनका कहना है कि पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहे चालक इन फैसलों से और अधिक परेशान हो रहे हैं। विलास भालेकर ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने जल्द ही इन समस्याओं का समाधान नहीं किया, तो पूरे महाराष्ट्र में बड़ा आंदोलन किया जाएगा, जिसके गंभीर परिणाम सरकार को भुगतने पड़ सकते हैं।
प्रदर्शन के दौरान ऑटो रिक्शा चालकों ने अपनी प्रमुख मांगों को लेकर जिल्हाधिकारी तथा प्रादेशिक परिवहन प्राधिकरण के अध्यक्ष को ज्ञापन सौंपा। इसमें ऑटो रिक्शा कल्याणकारी मंडल में लिए जा रहे सदस्यता शुल्क और वार्षिक शुल्क का विरोध किया गया। चालकों का कहना है कि आर्थिक तंगी के चलते वे यह शुल्क देने में असमर्थ हैं।
आरोप यह भी लगाया गया कि आरटीओ के माध्यम से चालकों पर जबरन मंडल की सदस्यता लेने का दबाव बनाया जा रहा है। सदस्यता न लेने पर वाहन पासिंग और लाइसेंस नवीनीकरण में बाधाएं उत्पन्न की जा रही हैं, जो पूरी तरह अनुचित है।
इसके अलावा प्रदर्शनकारियों ने ई-रिक्शा और ई-ऑटो के लिए जारी लाइसेंस पर भी सवाल उठाए और समान नियम लागू करने की मांग की। वहीं, राज्य में प्रतिबंधित बाइक टैक्सी के संचालन पर भी रोक लगाने की मांग की गई।
इस आंदोलन में विदर्भ के कई पदाधिकारी और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। सभी ने एकजुट होकर सरकार से ऑटो रिक्शा चालकों के हित में जल्द निर्णय लेने की मांग की।








