नई दिल्ली। कर्ज में डूबे ग्रुप जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड के लिए एक और बड़ी मुश्किल खड़ी हो गई है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) ने ग्रुप की सहायक कंपनी भिलाई जेपी सीमेंट के खिलाफ दिवालिया कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया है। यह कार्रवाई कंपनी के कर्जदाता सिद्धगिरि होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड की याचिका पर की गई है, जिसमें भिलाई जेपी सीमेंट पर 45 करोड़ रुपये बकाया होने का दावा किया गया था।
एनसीएलटी की कटक पीठ ने आदेश जारी करते हुए कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को निलंबित कर दिया है और इंटरिम रेज़ोल्यूशन प्रोफेशनल (आईआरपी) को नियुक्त किया है। साथ ही, दिवाला और दिवालियापन संहिता (आईबीसी) के तहत कंपनी को सुरक्षा प्रदान की गई है, ताकि इसके परिसंपत्तियों पर ऋण स्थगन के तहत कोई कार्रवाई न हो।
मामला क्या है?
भिलाई जेपी सीमेंट अपने परिचालन ऋणदाता सिद्धगिरि होल्डिंग्स से नियमित रूप से कोयला खरीद रही थी। सितंबर 2021 और जून 2022 के बीच कुल 6,000 मीट्रिक टन कोयले के तीन ऑर्डर जारी किए गए थे। इन ऑर्डरों के अनुसार, भुगतान आपूर्ति के 15 दिन बाद करना था, लेकिन सीमेंट कंपनी ने केवल आंशिक भुगतान किया।
आपूर्तिकर्ता ने 22 जून 2024 को आईबीसी के तहत 45.40 करोड़ रुपये की वैधानिक मांग नोटिस भेजी, जिसमें 30.08 करोड़ रुपये मूलधन और 15.32 करोड़ रुपये 24% ब्याज शामिल थे। कंपनी से कोई प्रतिक्रिया न मिलने पर सिद्धगिरि होल्डिंग्स ने एनसीएलटी में याचिका दायर की।
एनसीएलटी का आदेश
दो सदस्यीय पीठ दीप चंद्र जोशी और बनवारी लाल मीणा ने कहा, “हम मानते हैं कि एक बकाया परिचालन ऋण चूक के रूप में मौजूद है। इसलिए भिलाई जेपी सीमेंट के सीआईआरपी (कॉर्पोरेट इंसॉल्वेंसी रिज़ॉल्यूशन प्रोसेस) को शुरू करने की अनुमति दी जाती है।”
इस आदेश के तहत अब भिलाई जेपी सीमेंट के निदेशक मंडल को सभी अधिकारों से वंचित किया गया है और आईआरपी कंपनी के संचालन को संभालेगा। इससे कंपनी की परिसंपत्तियों और ऋणदाता हितों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
आगे की प्रक्रिया
एनसीएलटी के आदेश के बाद भिलाई जेपी सीमेंट की दिवालियापन प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इस बीच आईआरपी कंपनी के ऋणों और संपत्तियों का आकलन करेगा और दिवाला समाधान प्रक्रिया की रूपरेखा तैयार करेगा।
जयप्रकाश एसोसिएट्स ग्रुप के लिए यह दिवाला कार्यवाही एक गंभीर झटका है। सिद्धगिरि होल्डिंग्स की याचिका स्वीकार होने के बाद अब भिलाई जेपी सीमेंट की पूरी स्थिति आईबीसी नियमों के तहत नियंत्रित होगी।








