नागपुर। यदि छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन और विचारों को केवल किताबों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें अपने दैनिक जीवन में आत्मसात किया जाए तो समाज की सभी समस्याओं का समाधान संभव है। उक्त विचार ‘बेलगाम की इतिहास प्रबोधन संस्था’ के रविंद्र पाटिल ने व्यक्त किए। राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय में छत्रपति शिवाजी महाराज की 396वीं जयंती के अवसर पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन जमनालाल बजाज प्रशासनिक भवन के सभागार में किया गया था।
रविंद्र पाटिल ने ‘जीवन का स्वतः शिवचरित्र’ विषय पर अपने व्याख्यान में छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज केवल एक योद्धा या शासक नहीं थे, बल्कि वे एक आदर्श व्यक्तित्व थे जिनके विचार आज भी समाज के लिए मार्गदर्शक बन सकते हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि महाराज के विचारों को आत्मसात करना आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। वर्तमान दौर में जब समाज विभिन्न समस्याओं से जूझ रहा है, तब शिवाजी महाराज के आदर्शों को अपनाना और भी जरूरी हो जाता है।
व्याख्यान में पाटिल ने बताया कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने अपने शासनकाल में प्रजा के कल्याण को सर्वोपरि रखा। उन्होंने प्रजा की भलाई के लिए अनेक योजनाएं बनाईं और उन्हें लागू किया। महाराज का मानना था कि शासक का पहला कर्तव्य अपनी प्रजा की सुख-सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने रोजगार सृजन पर भी विशेष बल दिया। शिवाजी महाराज ने यह सुनिश्चित किया कि हर व्यक्ति को रोजगार मिले और कोई भी व्यक्ति भूखा न रहे। यह सोच आज के समय में भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी उस समय थी।
रविंद्र पाटिल ने अपने व्याख्यान में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रशासनिक कुशलता की भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि महाराज ने एक सशक्त और सुव्यवस्थित प्रशासन की स्थापना की थी। उनका प्रशासन पारदर्शी था और भ्रष्टाचार के लिए कोई जगह नहीं थी। शिवाजी महाराज ने स्वाभिमानी ‘स्वराज्य’ की स्थापना की जो किसी बाहरी शक्ति के अधीन नहीं था। उन्होंने अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। स्वराज्य की उनकी अवधारणा केवल राजनीतिक स्वतंत्रता तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसमें सांस्कृतिक और सामाजिक स्वतंत्रता भी शामिल थी।








