एकता नगर (गुजरात)। भारत में हर साल 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। सरदार पटेल भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख नेताओं में से एक थे और आज़ादी के बाद भारत के एकीकरण में उनकी भूमिका ऐतिहासिक रही। उन्होंने 562 रियासतों को भारतीय संघ में मिलाकर एक एकीकृत भारत की नींव रखी। यही कारण है कि उन्हें “भारत का लौह पुरुष” कहा जाता है।
राष्ट्रीय एकता दिवस का उद्देश्य देश में एकता, अखंडता और भाईचारे की भावना को सशक्त बनाना है।
इस वर्ष राष्ट्रीय एकता दिवस का मुख्य आयोजन गुजरात के एकता नगर (केवडिया) में स्थित ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ परिसर में हुआ। यह मूर्ति सरदार पटेल को समर्पित है और विश्व की सबसे ऊँची प्रतिमा मानी जाती है। इस कार्यक्रम में देशभर से हजारों लोग शामिल हुए।
भव्य आयोजन और देशभक्ति का माहौल
सुबह से ही एकता नगर में देशभक्ति और जोश का माहौल था। राष्ट्रीय ध्वज आरोहण, पुलिस और सशस्त्र बलों की परेड तथा एनसीसी की मार्च पास्ट से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। वायुसेना की ‘सूर्य किरण’ टीम ने आसमान में तिरंगे रंगों की अद्भुत छटा बिखेरी। महिलाओं के नेतृत्व में आयोजित ‘राष्ट्रीय एकता परेड’ ने कार्यक्रम में नई ऊर्जा का संचार किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन पर लोगों ने “जय सरदार, जय भारत” के नारे लगाए। पूरे क्षेत्र में उत्साह और देशभक्ति का वातावरण छा गया।
प्रधानमंत्री मोदी ने सरदार पटेल को दी श्रद्धांजलि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सर्वप्रथम स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर पुष्पांजलि अर्पित कर सरदार पटेल को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने दो मिनट का मौन रखकर राष्ट्र की एकता के लिए उनके योगदान को नमन किया। इसके बाद मोदी ने मंच से राष्ट्र को संबोधित किया। उनका भाषण सरदार पटेल के योगदान, कश्मीर के ऐतिहासिक संदर्भ और भारत की एकता के महत्व पर केंद्रित रहा।
मोदी बोले — “सरदार पटेल चाहते थे पूरा कश्मीर भारत में हो, लेकिन नेहरू ने रोक दिया”
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा —
“सरदार पटेल ने असंभव को संभव किया था। उन्होंने सैकड़ों रियासतों को एक सूत्र में बांधकर भारत को एक किया। लेकिन अफसोस की बात यह है कि जब जम्मू-कश्मीर के विलय की बात आई, तब उन्हें रोक दिया गया।”
उन्होंने आगे कहा —
“सरदार पटेल चाहते थे कि पूरा कश्मीर भारत का हिस्सा बने, लेकिन पंडित नेहरू ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया। अगर उस समय पटेल के सुझाव पर अमल हुआ होता, तो आज जम्मू-कश्मीर की दशकों पुरानी समस्या कभी पैदा ही नहीं होती।”
मोदी का यह बयान ऐतिहासिक संदर्भों की पुनर्समीक्षा था, जिसने दर्शकों में गहरा प्रभाव छोड़ा। उनके इस वक्तव्य पर सभा में उपस्थित जनसमूह ने ज़ोरदार तालियों से स्वागत किया।
कांग्रेस की औपनिवेशिक सोच पर हमला
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में कांग्रेस पार्टी पर भी तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि आज़ादी के बाद कांग्रेस औपनिवेशिक मानसिकता से बाहर नहीं निकल सकी।
“कांग्रेस की औपनिवेशिक सोच ने देश को वर्षों पीछे रखा। जो लोग आज हमें इतिहास का पाठ पढ़ाते हैं, वे ही उस समय के सबसे बड़े निर्णयों को रोकने के ज़िम्मेदार थे।”
मोदी ने कहा कि उनकी सरकार का लक्ष्य औपनिवेशिक सोच और व्यवस्थाओं से मुक्त भारत का निर्माण है। उन्होंने कहा —
“हम औपनिवेशिक कानूनों को समाप्त कर रहे हैं, प्रशासनिक ढांचे में सुधार कर रहे हैं और भारत को उसकी अपनी सभ्यता, संस्कृति और मूल्यों के अनुरूप पुनर्गठित कर रहे हैं। अब भारत किसी विदेशी विचारधारा से नहीं, बल्कि अपने स्वाभिमान से संचालित होगा।”
महिला नेतृत्व और ‘एकता परेड’ का आकर्षण
इस बार राष्ट्रीय एकता परेड की सबसे बड़ी विशेषता थी महिलाओं की अगुवाई। बीएसएफ, सीआरपीएफ, एसएसबी, राज्य पुलिस और एनसीसी की महिला टुकड़ियों ने मार्च पास्ट किया। प्रधानमंत्री मोदी ने इस दृश्य को भारत की बदलती शक्ति का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा —
“आज हमारी बेटियाँ हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं — सेना में, पुलिस में, विज्ञान और खेल में। यही असली ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना है।”
कार्यक्रम में महिला पायलटों की भागीदारी के साथ ‘सूर्य किरण’ टीम की तिरंगे रंगों की उड़ान ने आयोजन को और यादगार बना दिया।
1220 करोड़ रूपए की विकास परियोजनाओं की सौगात
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण के दौरान देश के विकास और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में नई सौगातों की घोषणा की। उन्होंने एकता नगर क्षेत्र के लिए 1220 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन किया। इनमें रेलवे स्टेशन का आधुनिकीकरण, नर्मदा घाटी के संरक्षण कार्य, पर्यटन विकास योजनाएँ और जनजातीय समुदायों के लिए कौशल विकास केंद्र शामिल हैं।
उन्होंने कहा —
“सरदार पटेल ने जिस भारत की कल्पना की थी, वह आत्मनिर्भर, सशक्त और एकजुट था। हम उसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। आज एकता नगर केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक बन चुका है।”
एकता की शपथ — “भारत की अखंडता मेरी जिम्मेदारी”
कार्यक्रम के अंत में प्रधानमंत्री ने देशवासियों को ‘राष्ट्रीय एकता शपथ’ दिलाई। उन्होंने लोगों से कहा —
“हम सबको यह संकल्प लेना चाहिए कि हम भारत की एकता, अखंडता और सुरक्षा को बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।”
इस अवसर पर हज़ारों लोगों ने हाथ उठाकर देश की एकता और अखंडता की शपथ ली। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह शपथ केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि यह हर नागरिक का कर्तव्य है।

कश्मीर से कन्याकुमारी तक एक भारत का संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज भारत कश्मीर से कन्याकुमारी तक और अटक से कटक तक एक सूत्र में बंधा हुआ है।
“जम्मू-कश्मीर में जो शांति और विकास आज दिख रहा है, वह सरदार पटेल के अधूरे सपने को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। अब भारत के किसी भी कोने को अलग-थलग नहीं छोड़ा जाएगा।”
उन्होंने कहा कि आज का भारत एकता की नई परिभाषा गढ़ रहा है — यह राजनीतिक सीमाओं से परे सामाजिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक एकता की पहचान है।
सांस्कृतिक कार्यक्रम और राष्ट्रगीत के साथ समापन
समापन के अवसर पर विभिन्न राज्यों के कलाकारों ने भारत की सांस्कृतिक विविधता का प्रदर्शन किया। लोकनृत्य, संगीत और बैंड प्रदर्शन ने पूरे वातावरण को जीवंत बना दिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने अंत में राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन किया और उपस्थित जनसमूह को दीपावली की शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा —
“दीपावली की तरह हर घर में एकता का दीप जलाना चाहिए। यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी हमारे लौह पुरुष सरदार पटेल को।”
मोदी का अंतिम संदेश — “इतिहास से सीखें, भविष्य बनाएं”
अपने भाषण के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा —
“भारत ने जो एकता की शक्ति दिखाई है, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी। सरदार पटेल ने हमें सिखाया कि मतभेदों के बावजूद राष्ट्रहित सर्वोपरि होना चाहिए। हमें इतिहास से सीखकर ऐसा भविष्य बनाना है, जहाँ कोई विभाजन न हो, कोई अलगाव न हो — केवल एकता, विकास और गौरव का भारत हो।”
एकता नगर में आयोजित इस भव्य समारोह ने यह संदेश दिया कि भारत आज भी सरदार पटेल के विचारों पर अडिग है। प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन केवल राजनीतिक वक्तव्य नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक स्मरण और भविष्य की दिशा दोनों था।
कश्मीर, औपनिवेशिक विरासत, महिला सशक्तिकरण और विकास परियोजनाओं पर उनके विचारों ने यह स्पष्ट किया कि भारत अब एक नए युग की ओर बढ़ रहा है — जहाँ एकता ही राष्ट्र की पहचान है।








