जयपुर जिले के मनोहरपुर इलाके में मंगलवार को एक दर्दनाक हादसे में निजी स्लीपर बस हाईटेंशन बिजली के तारों के संपर्क में आते ही आग की चपेट में आ गई, जिसमें दो मजदूरों की मौत हो गई जबकि 10 से अधिक लोग गंभीर रूप से झुलस गए। यह बस उत्तर प्रदेश के पीलीभीत से 50 से ज्यादा मजदूरों को लेकर मनोहरपुर स्थित एक ईंट भट्ठे की ओर जा रही थी। बस की छत पर मोटरसाइकिल, साइकिल और घरेलू सामान रखा हुआ था। मनोहरपुर क्षेत्र के एक कच्चे रास्ते से गुजरते समय यह सामान ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन लाइन से टकरा गया, और देखते ही देखते बस में भीषण आग लग गई। बस के अंदर रसोई गैस सिलेंडर भी रखे थे, जिससे आग तेजी से फैल गई। कई मजदूर जान बचाने के लिए तुरंत बस से कूद पड़े। घायलों को पहले शाहपुरा के सरकारी अस्पताल पहुँचाया गया, जहां से छह मजदूरों को गंभीर रूप से झुलस जाने के कारण जयपुर के एसएमएस अस्पताल रेफर किया गया, जबकि अन्य का वहीं प्राथमिक उपचार किया गया। जिला प्रशासन के अनुसार दो गैस सिलेंडरों में आग लगने से आग की तीव्रता और बढ़ गई। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि कुछ मजदूर नीचे उतरकर ड्राइवर को तारों से बचकर बस निकालने का संकेत दे रहे थे, लेकिन फिर भी छत पर रखा ऊँचा सामान तारों से छू गया और हादसा हो गया।

अधिकारियों के मुताबिक बस में अंदरूनी संरचना में अवैध रूप से बदलाव कर अधिक यात्रियों के लिए जगह बनाई गई थी और कोई आपातकालीन निकास द्वार मौजूद नहीं था, जो स्थिति को और खतरनाक बना रहा था। संभागीय आयुक्त पूनम ने कहा कि यह जांच की जा रही है कि बस में सिलेंडर और बाइक जैसी सामग्री किस अनुमति और नियम के तहत ले जाई जा रही थी, और मामले में उचित कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने घटना पर शोक जताते हुए घायलों के समुचित उपचार के निर्देश दिए। उपमुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री प्रेमचंद बैरवा ने हादसे की जांच की घोषणा की, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी इस घटना को दुखद बताया। उल्लेखनीय है कि राजस्थान में यह दो सप्ताह के भीतर दूसरी बड़ी बस आग दुर्घटना है। 14 अक्टूबर को जैसलमेर से जोधपुर जा रही एक स्लीपर बस में भी आग लगने से कई यात्रियों की जान चली गई थी, जिसका कारण ‘शॉर्ट सर्किट’ माना गया था। लगातार हो रहे ऐसे हादसों ने राज्य में परिवहन सुरक्षा और अवैध रूप से संशोधित बसों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।






