मुंबई। दक्षिण मुंबई में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नए राज्य मुख्यालय के लिए ली गई जमीन पर अब राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के नेता रोहित पवार ने आरोप लगाया है कि भू-हस्तांतरण के दौरान नियमों और कई शर्तों का उल्लंघन हुआ, लेकिन क्योंकि यह जमीन भाजपा कार्यालय के लिए इस्तेमाल हो रही है, इसलिए अधिकारियों ने अनियमितताओं पर जानबूझकर आंखें मूंद लीं। उन्होंने कहा कि यह पूरा मामला प्रशासन की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को चर्चगेट स्टेशन के पास स्थित इस भूखंड पर भाजपा कार्यालय की आधारशिला रखी थी। इसी के अगले दिन रोहित पवार ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा कि बहुमूल्य सार्वजनिक संपत्ति पर सवाल उठना स्वाभाविक है और नागरिकों को सच जानने का अधिकार है। पवार ने बताया कि वह पार्टी प्रतिनिधियों के साथ बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) आयुक्त भूषण गगरानी से मिले और जमीन हस्तांतरण प्रक्रिया पर विस्तृत चर्चा की। उनकी ओर से सभी आपत्तियों और सवालों की सूची वाला ज्ञापन सौंपा गया है। आयुक्त ने जल्द लिखित स्पष्टीकरण देने का भरोसा दिया है।
रोहित पवार ने मांग की है कि पट्टे और भूमि हस्तांतरण से जुड़ी सभी जानकारी सार्वजनिक की जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि नियमों के अनुरूप ही जमीन का आवंटन किया गया है या नहीं। उनका कहना है कि यदि सामान्य नागरिक या कोई अन्य पार्टी इस तरह की जमीन मांगती, तो क्या प्रशासन इसी तरह लचीला रुख अपनाता?
उधर, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि भाजपा ने नियमों के तहत चर्चगेट स्टेशन के समीप की निजी जमीन को पूरी अनुमति के साथ खरीदा है और इस मामले में किसी भी प्रकार का उल्लंघन नहीं किया गया है। फडणवीस के अनुसार विपक्ष बेवजह विवाद पैदा कर राजनीतिक स्वार्थ साधने की कोशिश कर रहा है।
बीजेपी के लिए महत्वपूर्ण इस प्रोजेक्ट पर अब राजनीति और गरमाने की पूरी संभावना है। सभी की नज़र अब बीएमसी की रिपोर्ट पर होगी, जो यह तय करेगी कि यह विवाद शांत होगा या और बड़ा रूप लेगा।











