देवेन्द्र फडणवीस ने उद्धव ठाकरे पर कसा तंज, एकनाथ शिंदे की सराहना की
मुंबई। मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस और शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे एक समय दोस्त रहे हैं। महाराष्ट्र में भी शिवसेना और भाजपा का गठबंधन था। शिवसेना और भाजपा अभी भी सत्ता में हैं। लेकिन 2022 में एकनाथ शिंदे ने शिव सेना में सबसे बड़ी बगावत कर दी, जिसके बाद से शिवसेना भाजपा के साथ है। उद्धव ठाकरे ने 2019 में कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के साथ मिलकर मुख्यमंत्री बनने का फैसला किया था। उस समय उन्होंने न तो देवेन्द्र फडणवीस का फोन उठाया था और न ही इस पर चर्चा की थी। 2019 के बाद से इन दोनों दिग्गज नेताओं के बीच लगातार जुबानी टकराव देखने को मिल रहा है।
अब मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने एक बार फिर से उद्धव ठाकरे को चुनौती दी है। चाहे एकनाथ शिंदे की शिवसेना के नेता हों या हमारे नेता, वे दिल्ली जा रहे हैं और हमारे शीर्ष नेताओं से मिल रहे हैं। इसमें कोई कठिनाई नहीं है। दिल्ली हमारे देश की राजधानी है। मैं महाराष्ट्र में चीनी मिलों के मुद्दे और प्याज के मुद्दे पर चर्चा करने के लिए दिल्ली भी जा रहा हूं। देवेन्द्र फडणवीस ने कहा है कि अगर महाराष्ट्र को आगे बढ़ाना है तो दिल्ली जाना होगा। क्या राजनीतिक ज्वलंत मुद्दों को भी दिल्ली ले जाना पड़ता है? इस बारे में पूछे जाने पर देवेन्द्र फडणवीस ने कहा कि अब कोई ज्वलंत राजनीतिक सवाल नहीं बचा है। हम सिर्फ राज्य की समस्याएं लेकर दिल्ली जा रहे हैं। ऐसा कहकर उन्होंने इस बात का जवाब दिया है कि दिल्लीवारी क्यों की जाती है। मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में देवेन्द्र फडणवीस की विशेष उपस्थिति रही। इस कार्यक्रम में उनका साक्षात्कार लिया गया। इस इंटरव्यू में उन्होंने ये बयान दिया है। साथ ही बिना उद्धव ठाकरे का नाम लिए उनकी आलोचना की है और एकनाथ शिंदे की तारीफ भी की है।
एकनाथ शिंदे की शिवसेना में व्यावहारिक नेता
क्या पिछली शिव सेना से निपटना आसान था या वर्तमान शिव सेना से निपटना आसान है? एक पल की भी देरी किए बिना मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने कहा कि अब निपटना बहुत आसान हो गया है। व्यावहारिक लोग हैं। उन पर चर्चा की जा सकती है। आज के नेता फोन बंद या दरवाजा बंद करने वाले नहीं हैं। इसलिए मौजूदा शिवसेना नेताओं से चर्चा करना आसान है। ऐसा देवेन्द्र फडणवीस ने कहा है। मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने उद्धव ठाकरे से कहा है कि आज के नेता फोन बंद करके या दरवाजा बंद करके नहीं बैठते हैं। उन्होंने एकनाथ शिंदे की तारीफ की है। लेकिन उनका बयान उतना सीधा नहीं है जितना लगता है। यह बयान 2019 को संदर्भित करता है।
2019 में क्या हुआ?
भाजपा और शिवसेना दोनों ने मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ा था और तब भाजपा को 105 और शिवसेना को 54 विधायक मिले थे। हालांकि, मुख्यमंत्री पद के बराबर आवंटन के कारण दोनों पार्टियों के बीच चिंगारी भड़क गई और सबसे बड़ी पार्टी भाजपा को इसके खिलाफ बैठना पड़ा क्योंकि शिवसेना ने कांग्रेस और एनसीपी के समर्थन से सरकार बनाई थी। महाविकास आघाड़ी के इस प्रयोग की न तो लोगों को उम्मीद थी और न ही महाराष्ट्र की राजनीति में ऐसा कभी हुआ था। लेकिन कांग्रेस और एनसीपी के समर्थन से उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बन गये। वह नवंबर 2019 से जून 2022 तक ढाई साल तक महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे। इन सभी घटनाक्रमों से पहले देवेन्द्र फडणवीस ने उद्धव ठाकरे को फोन किया था। चर्चा की तैयारी भी दिखी। लेकिन उद्धव ठाकरे ने उनका फोन तक नहीं उठाया, विवाद से बाहर निकलकर चर्चा करने की कोशिश तक नहीं की। ये बात खुद देवेन्द्र फडणवीस एक पुराने इंटरव्यू में कह चुके हैं।













