समान नागरिक संहिता नागपुर के शीतकालीन सत्र में होगी पेश : मुख्यमंत्री की घोषणा
लोकवाहिनी, संवाददाता
मुंबई। उत्तराखंड के बाद अब महाराष्ट्र में भी जल्द ही समान नागरिक संहिता लागू होने की दिशा में कदम बढ़ रहे हैं। इस संबंध में मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने पिछले विधानसभा सत्र में ही जानकारी दी थी। समान नागरिक संहिता के लिए सात सदस्यीय समिति गठित की जा रही है और सामान्य प्रशासन विभाग के माध्यम से इसकी घोषणा की गई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने आज विधानसभा में एक बार फिर समान नागरिक संहिता को लेकर घोषणा की। यह समिति अगले छह महीनों में अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। समान नागरिक संहिता का मसौदा नागपुर में होने वाले आगामी शीतकालीन सत्र में प्रस्तुत किया जाएगा। दोनों सदनों के सामने मसौदा आने के बाद उसे कानून का रूप देने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि समान नागरिक संहिता लागू करने की प्रक्रिया में सरकार सभी आवश्यक संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों का पालन करेगी तथा राज्य में इस संहिता को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। यह समिति राज्य में मौजूदा व्यक्तिगत, सामाजिक और प्रशासनिक कानूनों की व्यापक समीक्षा करेगी और महाराष्ट्र की सामाजिक, सांस्कृतिक विविधता को ध्यान में रखते हुए राज्य के लिए स्वतंत्र समान नागरिक संहिता का मसौदा तैयार करेगी। विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति और गोद लेने जैसे विषयों में महिलाओं को समान कानूनी अधिकार मिलें, इस पर समिति विशेष जोर देगी। इसके साथ ही विभिन्न सामाजिक समूहों के सुझावों को भी ध्यान में रखते हुए रिपोर्ट तैयार की जाएगी। समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति अधिकार और बच्चे को गोद लेने जैसी व्यक्तिगत मामलों में धर्म, जाति या संप्रदाय के आधार पर अलग-अलग कानून लागू नहीं रहेंगे। इसके बजाय राज्य के सभी नागरिकों के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था लागू होगी।
2026 के बजट सत्र में समान नागरिक संहिता और उसके क्रियान्वयन के लिए समिति की घोषणा किए जाने की बात मुख्यमंत्री ने कही थी। उसी के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश रंजना देसाई की अध्यक्षता में सात सदस्यीय समिति गठित की जा रही है, ऐसी जानकारी आशीष शेलार ने दी। इस बीच, समान नागरिक संहिता के लिए यह सात सदस्यीय समिति बनाई गई है। दिसंबर के विधानसभा सत्र तक इसकी रिपोर्ट तैयार की जाएगी और दोनों सदनों में विधेयक पेश किया जाएगा, ऐसा भी आशीष शेलार ने मीडिया से बातचीत में कहा। उत्तराखंड में 27 जनवरी 2025 को समान नागरिक संहिता लागू की गई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसकी घोषणा की थी। समान नागरिक संहिता लागू करने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना। पिछले वर्ष 7 फरवरी को उत्तराखंड विधानसभा ने नागरिक संहिता को मंजूरी दी थी। 18 अक्टूबर 2024 को इस संबंध में गठित समिति ने समान नागरिक संहिता पर अपनी रिपोर्ट सौंपी थी।













