जलसंसाधन विभाग में क्या चल रहा है…. भाग – 15
राज्यस्तरीय खेल एवं सांस्कृतिक प्रतियोगिता के खर्च को लेकर उठे गंभीर सवाल
लोकवाहिनी न्यूज
नागपुर। राज्यस्तरीय खेल एवं सांस्कृतिक प्रतियोगिता जलसंसाधन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच खेल भावना, सांस्कृतिक जागरूकता और आपसी समन्वय बढ़ाने वाला एक प्रतिष्ठित उपक्रम माना जाता है। ऐसी प्रतियोगिताएं कर्मचारी कल्याण की दृष्टि से उपयोगी होने को लेकर कोई दो राय नहीं है। लेकिन इस प्रतियोगिता के आयोजन में हुए खर्च और कथित खरीद प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों के कारण अब पूरे आयोजन पर ही चर्चा की छाया पड़ गई है। खेलहित पहले या खेल में सेहत पहले? यह सवाल अब कई लोगों की चर्चा का विषय बन गया है। नागपुर में आयोजित जलसंसाधन विभाग की राज्यस्तरीय खेल एवं सांस्कृतिक प्रतियोगिता के लिए सामग्री, सेवाओं और विभिन्न व्यवस्थाओं पर बड़े पैमाने पर खर्च किए जाने की बात कही जा रही है। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार यह खर्च दो से तीन करोड़ रुपये के आसपास होने की चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं। सबसे बड़ा सवाल यह सामने आ रहा है कि जिस जलसंसाधन विभाग में कई विकास कार्यों के लिए धन की कमी के कारण काम लंबित होने की बात कही जाती है, उसी विभाग द्वारा खेल प्रतियोगिताओं के लिए इतनी बड़ी राशि खर्च करना कितना उचित था? कई सिंचाई परियोजनाओं, नहरों की मरम्मत, रखरखाव, जल संरक्षण के कार्यों और अन्य विकास कार्यों के लिए निधि अपर्याप्त होने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, ऐसे समय में इस तरह के आयोजन के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जाने का गंभीर आरोप और भी गंभीर हो जाता है।
इस प्रतियोगिता में राज्यभर से लगभग 1,800 अधिकारी और कर्मचारियों के शामिल होने की बात कही जाती है। इन सभी के नागपुर तक आने-जाने का खर्च संबंधित निगमों या विभागों द्वारा उठाए जाने की चर्चा है। इसके साथ ही निवास, भोजन, स्थानीय परिवहन, खेल सामग्री, सांस्कृतिक कार्यक्रम, मंच निर्माण, ध्वनि व्यवस्था, प्रचार-प्रसार, स्मृति चिह्न और अन्य व्यवस्थाओं पर हुआ खर्च नियमों के विरुद्ध तरीके से निगम के निर्माणाधीन प्रकल्प के खर्च से किया गया, होने की जानकारी सामने आ रही है। इसके अलावा एक और महत्वपूर्ण मुद्दा प्रत्यक्ष खर्च का है। राज्यस्तरीय प्रतियोगिता से पहले विभिन्न विभागों के अंतर्गत चयन प्रतियोगिताएं आयोजित की गई। इसके लिए कई अधिकारी और कर्मचारी 25-30 दिनों तक कार्यालयीन कार्यों से दूर रहे। इसमें अभ्यास शिविर और अंतिम प्रतियोगिता के कारण कई कर्मचारी 25-30 दिनों तक कार्यालय से बाहर रहे। इस अवधि में नियमित वेतन जारी रहा, जबकि कई कार्यालयों के दैनिक कामकाज पर इतना प्रभाव पड़ा कि उन कार्यालयों में काम ही नहीं हुआ, ऐसी चर्चा है। इस कारण केवल आयोजन का प्रत्यक्ष खर्च ही नहीं, बल्कि कार्यालयीन कार्य न होना, काम का ढेर बढ़ना, इसके कारण काम की लागत बढ़ना, यात्रा और मानव संसाधन के उपयोग जैसे अप्रत्यक्ष खर्च भी बड़े पैमाने पर हुए होने का दावा कुछ स्तरों से किया जा रहा है। कुछ लोगों के अनुसार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष खर्च मिलाकर कुल आर्थिक भार दस-बारह करोड़ रुपये के आसपास गया होगा।













