लोकवाहिनी, संवाददाता
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के अयोध्या में स्थित राम जन्मभूमि मंदिर के दान में कथित हेराफेरी का मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालत के दरवाजे पर पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट सोमवार को सुनवाई करेगा। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में सीबीआई की निगरानी में समिति गठित कर पूरे मामले की जांच की मांग की गई है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि दान की राशि में कोई गबन, भ्रष्टाचार या वित्तीय अनियमितता हुआ है या नहीं। सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वीएस मोहना की पीठ दायर याचिका पर सुनवाई करेगी। कोर्ट वकील अजय कुमार राय, वकील दिनेश कुमार यादव और राष्ट्रीय जनता दल के सांसद सुधाकर सिंह की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। पिछली सुनवाई की अवकाशकालीन पीठ दायर याचिका पर जल्द सुनवाई से इनकार कर दिया था। यह सुनवाई ऐसे समय में हो रही है जब उत्तर प्रदेश में कथित गबन की जांच जारी है। 7 जुलाई को, अयोध्या की एक अदालत ने मामले में गिरफ्तार आठ आरोपियों में से तीन अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडे को एक दिन की पुलिस कस्टडी दी थी।
इससे पहले, 29 जून को, एक लोकल अदालत ने सभी आठ आरोपियों को 14 दिन की ज्यूडिशियल कस्टडी में भेज दिया था। दान में हेराफेरी के आरोप सामने आने के बाद मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को तीन सदस्यों वाली एसआईटी बनाई थी। एसआईटी में लखनऊ डिविजनल कमिश्नर विजय विश्वास पंत, पुलिस इंस्पेक्टर जनरल किरण एस और स्पेशल सेक्रेटरी (फाइनेंस) नील रतन शामिल हैं। एसआईटी की शुरुआती जांच में मंदिर के काउंटिंग रूम में गंभीर सुरक्षा चूक की ओर इशारा किया गया है और यह सुझाव दिया गया है कि कथित चोरी सिस्टेमैटिक थी और अलग-अलग नहीं बल्कि बार-बार हुई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद 27 अप्रैल से 5 जून के बीच करीब 70 संदिग्ध घटनाएं हुई, जिनमें काउंटिंग स्टाफ कथित तौर पर अपने कपड़ों, जेबों, जूतों और दूसरे निजी सामान में कैश के बंडल छिपाते हुए देखे गए थे।














