वरिष्ठ इतिहासकार जयसिंगराव पवार का निधन
50 वर्षों तक मराठा इतिहास को समर्पित जीवन
संभाजी, ताराबाई जैसे चरित्रों को दिलाई पहचान
इतिहास जगत में शोक की लहर, अपूरणीय क्षति
कोल्हापूर:महाराष्ट्र के प्रख्यात इतिहासकार डॉ. जयसिंगराव पवार का निधन हो गया, जिससे इतिहास जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। पिछले पांच दशकों से वे मराठा इतिहास के शोध, लेखन और संरक्षण में निरंतर सक्रिय रहे और उन्होंने अपने कार्यों से इतिहास को नई दिशा दी।
“इतिहास समाज का प्रबोधक होता है” इस विचार को जीवन मंत्र मानकर पवार ने मराठा साम्राज्य के कई ऐसे अध्यायों को सामने लाया, जिन्हें पहले पर्याप्त महत्व नहीं मिला था। उन्होंने छत्रपति संभाजी महाराज, महारानी ताराबाई, राजाराम महाराज और सेनापति संताजी घोरपड़े जैसे वीरों के जीवन पर गहन शोध कर उनके योगदान को उजागर किया। पवार का ‘राजर्षि शाहू स्मारक ग्रंथ’ इतिहास लेखन का एक मानक माना जाता है। राजर्षि शाहू महाराज के जीवन और कार्यों को जन-जन तक पहुंचाना उन्होंने अपना जीवन उद्देश्य बना लिया था। उन्होंने न केवल इस विषय पर ग्रंथ तैयार किया, बल्कि इसे विभिन्न भारतीय और विदेशी भाषाओं में प्रकाशित कर वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास किया।
अपने लंबे करियर में पवार ने कई महत्वपूर्ण संस्थानों में नेतृत्व की भूमिका निभाई। वे राजर्षि शाहू स्मारक भवन के संचालक और शिवाजी विश्वविद्यालय के शाहू शोध केंद्र के निदेशक के रूप में भी कार्यरत रहे। वे केवल एक इतिहासकार ही नहीं, बल्कि युवा शोधकर्ताओं के मार्गदर्शक भी थे। उन्होंने अनेक विद्यार्थियों और इतिहास प्रेमियों को शोध की दिशा दिखाई और इतिहास लेखन की बारीकियों से परिचित कराया।
डॉ. जयसिंगराव पवार का निधन महाराष्ट्र के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनका योगदान सदैव इतिहास प्रेमियों को प्रेरित करता रहेगा।












