मुंबई। महाराष्ट्र के बहुचर्चित कोरेगांव भीमा हिंसा प्रकरण में जांच आयोग ने गुरुवार को एक अहम कदम उठाते हुए राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी किया है।
आयोग ने यह नोटिस इस आधार पर जारी किया कि ठाकरे ने आयोग के समक्ष दस्तावेज प्रस्तुत करने से संबंधित अर्जी का जवाब नहीं दिया था। आयोग ने पूछा है कि क्यों न वंचित बहुजन अघाड़ी (VBA) प्रमुख प्रकाश आंबेडकर की ओर से दाखिल उस आवेदन को स्वीकार किया जाए जिसमें ठाकरे के खिलाफ जमानती वारंट जारी करने की मांग की गई है।
आयोग की अध्यक्षता उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जे. एन. पटेल कर रहे हैं, जबकि पूर्व मुख्य सचिव सुमित मलिक सदस्य हैं। आयोग ने बताया कि ठाकरे को इससे पहले 12 सितंबर और 27 अक्टूबर को भी नोटिस भेजे गए थे, लेकिन उन्होंने अब तक कोई जवाब नहीं दिया।
प्रकाश आंबेडकर ने फरवरी 2025 में आयोग के समक्ष आवेदन दाखिल कर अनुरोध किया था कि ठाकरे को उन दस्तावेजों को प्रस्तुत करने का निर्देश दिया जाए जो उन्हें राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के प्रमुख शरद पवार ने वर्ष 2020 में सौंपे थे।
आंबेडकर का दावा है कि इन दस्तावेजों में यह उल्लेख है कि 2018 में पुणे के पास कोरेगांव भीमा हिंसा के पीछे कुछ दक्षिणपंथी संगठनों की भूमिका थी।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि आगामी 2 दिसंबर को होने वाली अगली सुनवाई में ठाकरे या उनके कानूनी प्रतिनिधि उपस्थित नहीं होते हैं, तो उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि महाराष्ट्र सरकार ने इस हिंसा की जांच के लिए फरवरी 2018 में दो सदस्यीय आयोग गठित किया था।
पुलिस के अनुसार, 1 जनवरी 2018 को 1818 के कोरेगांव भीमा युद्ध की द्विशताब्दी समारोह के दौरान हिंसा भड़क उठी थी, जिसमें एक व्यक्ति की मौत और कई पुलिसकर्मी घायल हुए थे।
पुलिस का यह भी आरोप था कि हिंसा से एक दिन पहले, 31 दिसंबर 2017 को पुणे में आयोजित ‘एल्गार परिषद सम्मेलन’ में दिए गए भड़काऊ भाषणों ने इस घटना को जन्म दिया।
पुलिस ने दावा किया था कि इस सम्मेलन के आयोजकों के माओवादी संगठनों से संबंध थे।






