मुंबई। नेटफ्लिक्स की लोकप्रिय हिंदी वेब सीरीज ‘जामताड़ा 2’ में भूमिका निभा चुके मराठी अभिनेता सचिन चंदवाड़े की आत्महत्या की खबर से मनोरंजन जगत में शोक की लहर है। मात्र 25 वर्ष की उम्र में उनका यूं दुनिया को अलविदा कह देना सभी के लिए चौंकाने वाला है। जानकारी के अनुसार, 23 अक्टूबर को भाई दूज के दिन सचिन को जलगांव जिले के उंदिरखेड़े गांव स्थित अपने घर में फंदे से लटका हुआ पाया गया। परिवार के सदस्य उन्हें गंभीर हालत में धुले के एक निजी अस्पताल ले गए, लेकिन 24 अक्टूबर की रात इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। पुलिस को घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है, जिसके कारण उनकी मौत की वजह फिलहाल एक रहस्य बनी हुई है।
सचिन चंदवाड़े न सिर्फ एक्टर थे, बल्कि सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में भी काम कर रहे थे। बताया जा रहा है कि वह पुणे में नौकरी करते हुए अभिनय के अपने सपने को साकार करने की कोशिश में लगे थे। उनकी प्रतिभा और लगन के चलते इंडस्ट्री में उन्हें एक उभरते सितारे के रूप में देखा जा रहा था। हाल ही में उन्होंने अपनी आगामी मराठी फिल्म ‘असुरवन’ का पोस्टर सोशल मीडिया पर साझा किया था, जिसमें वह मुख्य किरदार ‘सोमा’ के रूप में दिखाई देने वाले थे। माना जा रहा था कि यह किरदार उनके करियर में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता था। इसके अलावा वह मराठी फिल्म ‘विझा क्लोज’ में भी नजर आ चुके थे और कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि वह ‘जामताड़ा’ के अगले सीजन का भी हिस्सा हो सकते थे, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी।
उनकी मौत ने एक बार फिर इस बात पर चिंता बढ़ा दी है कि मनोरंजन उद्योग में युवा कलाकारों पर बढ़ता मानसिक दबाव किस तरह उन्हें चरम कदम उठाने के लिए मजबूर कर रहा है। दिवाली के उत्सव के बीच उनके निधन की खबर से न सिर्फ परिवार सदमे में है बल्कि इंडस्ट्री के साथी और प्रशंसक भी बेहद दुखी हैं। ‘असुरवन’ के निर्देशक सचिन रामचंद्र आंबात ने सोशल मीडिया पर शोक व्यक्त करते हुए लिखा— “सोमा, तुमने बहुत गलत किया।” वहीं उनकी सह-कलाकार पूजा मोइली सहित अन्य कलाकारों ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की और इसे कला जगत के लिए बड़ी क्षति बताया।
परिवार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। पोस्टमार्टम के बाद सचिन का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव उंदिरखेड़े में किया गया। उनकी मृत्यु ने कई अनुत्तरित सवाल छोड़ दिए हैं— क्या वह निजी दुविधाओं से जूझ रहे थे? क्या उनके सपनों का दबाव भारी पड़ गया? या फिर कुछ और था जिसने उन्हें यह कठोर निर्णय लेने पर मजबूर कर दिया? फिलहाल पुलिस जांच जारी है और सचिन की अधूरी कहानी हमेशा याद दिलाती रहेगी कि चमकते चेहरों के पीछे कभी-कभी गहरी खामोशी छिपी होती है।








