आंध्र प्रदेश में चक्रवाती तूफान मोंथा ने सोमवार रात भारी तबाही मचाई। तेज हवाओं और भारी बारिश ने पूरे तटीय इलाकों को अस्त-व्यस्त कर दिया। कई जगहों पर पेड़ उखड़ गए और सड़कें पूरी तरह जलमग्न हो गईं।
कोनासीमा जिले में तूफान के कारण एक दर्दनाक हादसा हुआ। मकानगुडेम गांव में तेज हवा से एक ताड़ का पेड़ गिर गया। इस हादसे में 43 वर्षीय महिला की मौके पर ही मौत हो गई। प्रशासन ने इस घटना की पुष्टि की है।
सरकार ने कहा है कि मोंथा चक्रवात ने किसानों को सबसे बड़ा नुकसान पहुंचाया है। प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार 38,000 हेक्टेयर में खड़ी कृषि फसलें बर्बाद हो गई हैं। वहीं 1.38 लाख हेक्टेयर में बागवानी फसलें भी क्षतिग्रस्त हुई हैं।
पश्चिम गोदावरी जिले में हालात और भी चिंताजनक रहे। यहां 141 से अधिक पेड़ उखड़ गए। इतना ही नहीं, बाढ़ जैसे हालात बनते ही सांपों के घरों में घुस आने से लोगों को सांप के काटने की आठ घटनाएं भी दर्ज की गई हैं। राहत की बात यह रही कि जिले में किसी की जान नहीं गई।
अधिकारियों ने बताया कि तूफान ने बिजली व्यवस्था को भी प्रभावित किया। हालांकि आपूर्ति में बड़ी बाधा नहीं आई। एहतियातन कुछ जगहों पर बिजली काटी गई ताकि जनहानि से बचा जा सके।
राहत और बचाव कार्य में पुलिस और प्रशासन लगातार जुटा हुआ है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक वी. भीमा राव ने बताया कि उखड़े हुए पेड़ों को 15 मिनट के भीतर रास्तों से हटाकर ट्रैफिक बहाल कर दिया गया। इससे स्पष्ट होता है कि तूफान से निपटने के लिए तैयारी मजबूत थी।
आधी रात में जब चक्रवात इंटरवेदी के पास तट को पार कर रहा था, तब समुद्र पैरों·पेरूपलेम गांव तक पहुंच गया था। समुद्र के उफान से तटीय सड़कों पर पानी भर गया और आसपास के लोग दहशत में आ गए।
कोनासीमा जिले में 200 से ज्यादा पेड़ और 70 विद्युत स्तंभ गिरने की भी खबर है। पेड़ों के गिरने से दो लोग घायल हो गए जिनका इलाज जारी है।
मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने पूरी स्थिति पर नजर रखी हुई है। उन्होंने अधिकारियों को तुरंत राहत कार्य शुरू करने और प्रभावित लोगों को सभी आवश्यक चीजें उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
सरकार ने राहत सामग्री मुफ्त बांटने का फैसला किया है। हर प्रभावित परिवार को 25 किलो चावल, लाल चना दाल, तेल, प्याज, आलू और चीनी दी जाएगी। वहीं मछुआरों और बुनकरों को 50 किलो चावल दिए जाएंगे ताकि वे फिर से अपने जीवन को पटरी पर ला सकें।










