दुबई। यमन में अप्रैल 2025 में हुए अमेरिकी हवाई हमले को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने मांग की है कि इस हमले की जांच संभावित युद्ध अपराध के रूप में की जानी चाहिए। आरोप है कि इस हमले में 60 से अधिक अफ्रीकी प्रवासियों की मौत हुई थी, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे।
हमला कहाँ और कब हुआ?
यह हमला 28 अप्रैल को यमन के उत्तरी प्रांत सादा में हुआ, जहां हूती विद्रोहियों द्वारा संचालित एक जेल को निशाना बनाया गया था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में चलाए जा रहे हवाई अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई, जिसका उद्देश्य इजराइल-हमास संघर्ष के दौरान लाल सागर में जहाज़ी मार्ग बाधित करने वाले हूती नेटवर्क को निशाना बनाना था।
अमेरिका अभी भी चुप — जवाब की प्रतीक्षा
अमेरिकी सेना की मध्य कमान (CENTCOM) ने हमले पर अभी कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया है।
हालाँकि, अमेरिकी नौसेना के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने कहा:
“हम नागरिकों की मौत की सभी रिपोर्ट्स को बेहद गंभीरता से लेते हैं।
ऑपरेशन ‘रफ राइडर’ की जांच रिपोर्ट जल्द जारी की जाएगी।”
पहले भी बना था निशाना
एमनेस्टी का कहना है कि जिस जेल को निशाना बनाया गया, उस पर इससे पहले सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने भी हमला किया था। इससे सवाल उठता है कि क्या अमेरिका को इस स्थल के नागरिकों से भरे होने की जानकारी थी?
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें अब इस बात पर हैं कि क्या इस घटना को युद्ध अपराध की श्रेणी में रखने के लिए पर्याप्त कदम उठाए जाएंगे — या फिर यह भी यमन के खूनी संघर्ष की अनसुनी कहानियों में खो जाएगा।








