मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के किसानों को बड़ी राहत देते हुए ई-फसल सर्वेक्षण (Digital Crop Survey) की समय सीमा बढ़ाने का फैसला किया है। अब किसान 30 नवंबर 2025 तक अपनी फसलों का डिजिटल पंजीकरण करा सकेंगे। यह निर्णय तब लिया गया जब पता चला कि अक्टूबर माह के अंत तक राज्य में केवल 36 प्रतिशत फसल क्षेत्र का ही सर्वेक्षण पूरा हुआ है।
समय सीमा बढ़ाने का निर्णय
राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने गुरुवार को यह घोषणा की। उन्होंने बताया कि सर्वेक्षण की प्रगति अपेक्षा से काफी धीमी रही है, इसलिए किसानों को अतिरिक्त समय देना आवश्यक था। सरकार चाहती है कि कोई भी किसान तकनीकी या प्रशासनिक देरी की वजह से फसल बीमा, प्राकृतिक आपदा राहत या ऋण योजनाओं से वंचित न रह जाए।
प्रशासन को दिए गए निर्देश
मंत्री बावनकुले ने सभी जिलाधिकारियों (District Collectors) को निर्देश जारी किए हैं कि वे विस्तारित समय सीमा के भीतर 100 प्रतिशत फसल निरीक्षण और पंजीकरण सुनिश्चित करें।
उन्होंने कहा कि अधिकारी गांव स्तर पर सर्वेक्षण टीमों को सक्रिय करें और किसानों को अधिक से अधिक जागरूक करें ताकि हर खेत का डेटा सिस्टम में दर्ज हो सके।
क्या है ई-फसल सर्वेक्षण?
ई-फसल सर्वेक्षण एक मोबाइल-आधारित डिजिटल पहल है जिसके माध्यम से किसान अपनी फसलों की जानकारी ऑनलाइन दर्ज करते हैं। यह सर्वेक्षण जियो-फेंसिंग, सैटेलाइट इमेजरी और मोबाइल ऐप तकनीक पर आधारित है।
इस डिजिटल प्रणाली से सरकार को वास्तविक समय में फसल की स्थिति, क्षेत्रफल और उत्पादन अनुमान जैसी सूचनाएँ प्राप्त होती हैं।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य किसानों की फसलों का सटीक और पारदर्शी डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना है। इससे राज्य सरकार को कृषि योजनाओं के कार्यान्वयन, फसल बीमा दावों के निपटारे और राहत वितरण में मदद मिलेगी।
इसके साथ ही, भविष्य में फसल हानि की स्थिति में किसानों को तेजी से मुआवजा और बीमा लाभ मिल सकेंगे।
किसानों के लिए क्यों ज़रूरी है यह सर्वेक्षण?
कई बार किसान अपनी फसलों को समय पर पंजीकृत नहीं करा पाते, जिससे प्राकृतिक आपदाओं या कीटों के नुकसान की स्थिति में उन्हें राहत राशि नहीं मिल पाती।
ई-फसल सर्वेक्षण सुनिश्चित करता है कि हर किसान की फसल का रिकॉर्ड सरकारी डेटाबेस में मौजूद रहे। इससे उन्हें विभिन्न योजनाओं — जैसे फसल बीमा, पीएम-किसान योजना और कृषि ऋण — का लाभ आसानी से मिलेगा।
राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, अब तक केवल 36 प्रतिशत फसल क्षेत्र का डिजिटल सर्वेक्षण पूरा हुआ है। ग्रामीण इलाकों में नेटवर्क की कमी, सर्वेक्षण टीमों की सीमित संख्या और किसानों की कम भागीदारी इसके प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं।
सरकार ने अब इस स्थिति को सुधारने के लिए सर्वेक्षण अवधि एक महीने बढ़ाने का निर्णय लिया है।
राजस्व विभाग ने सभी जिलों में समीक्षा बैठकों की तैयारी शुरू कर दी है। हर जिले में प्रगति की निगरानी की जाएगी और दैनिक रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
सरकार का लक्ष्य है कि 30 नवंबर तक पूरे राज्य का 100 प्रतिशत फसल सर्वेक्षण पूरा हो जाए, ताकि कृषि योजनाओं के लिए एक विश्वसनीय डेटाबेस तैयार किया जा सके।
महाराष्ट्र का यह कदम किसानों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। डिजिटल सर्वेक्षण के जरिए कृषि क्षेत्र को तकनीक से जोड़ने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण पहल है।
सरकार को उम्मीद है कि इस विस्तार से ज्यादा से ज्यादा किसान अपने खेतों का पंजीकरण करा पाएंगे और आने वाले मौसम में किसी भी आपदा या नुकसान की स्थिति में उन्हें समय पर सहायता और मुआवजा मिल सकेगा।











