तिरस्कार से सम्मान तक, कोल्हापुर ने दिखाया रास्ता
हर हाथ जरूरी है, हर जीवन की रक्षा के लिए
कोल्हापुर में सामाजिक समावेशन और मानवीय संवेदनशीलता का एक ऐतिहासिक उदाहरण सामने आया है, जहाँ आपदा प्रबंधन कार्यों में तृतीयपंथी समुदाय को भी शामिल किया गया है। यह पहल कोल्हापुर जिला आपत्ती व्यवस्थापन कक्ष द्वारा शुरू की गई है, जिसका उद्देश्य आपदाओं के समय राहत और बचाव कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाना है।
इस निर्णय के तहत दस सदस्यीय तृतीयपंथी टीम को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। यह प्रशिक्षण कोल्हापुर के राजाराम तालाब में आयोजित किया गया, जहाँ उन्हें मोटर बोट चलाने, जल में डूबते व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालने, प्राथमिक उपचार देने तथा आपदा के समय त्वरित प्रतिक्रिया देने की तकनीकें सिखाई गईं। इसके अलावा उन्हें बोट तैयार करने और आपात स्थिति में उपकरणों का सही उपयोग करने का व्यावहारिक ज्ञान भी प्रदान किया गया।
जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी प्रसाद संकपाल ने बताया कि यह पहल अपने आप में अनोखी और संभवतः दुनिया की पहली ऐसी योजना है, जिसमें तृतीयपंथी समुदाय को औपचारिक रूप से आपदा राहत दल में शामिल किया गया है। इस पहल का उद्देश्य समाज के हर वर्ग को मुख्यधारा से जोड़ना और आपदा प्रबंधन को अधिक मजबूत बनाना है।
जिला कलेक्टर डॉ. विजय राठौड़ के मार्गदर्शन में तथा “मैत्री” संगठन की प्रमुख मयुरी आळवेकर, शिवानी गजबर, झोया दिन्नी, सुलभा, वैशाली और मोगरा जैसे सदस्यों की भागीदारी से यह प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
इस कदम को सामाजिक समानता और सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। इससे न केवल तृतीयपंथी समुदाय को सम्मान मिलेगा, बल्कि आपदा प्रबंधन व्यवस्था भी अधिक समावेशी और सक्षम बनेगी।












