वॉशिंगटन डीसी। अमेरिका और ईरान के बीच करीब 40 दिन बाद 2 हफ्ते के लिए सीजफायर (युद्धविराम) पर सहमति बनी है। ट्रंप ने बताया कि यह फैसला पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ की अपील के बाद लिया गया।
वहीं अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने दावा किया कि ईरान की लीडरशिप सीजफायर के लिए भीख मांग रही थी, क्योंकि उसके पास कोई रास्ता नहीं बचा था। उन्होंने कहा कि अब किसी भी हालत में ईरान को परमाणु बम बनाने नहीं दिया जाएगा। हेगसेथ ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) खुला है और जहाज वहां से गुजरते रहेंगे। अमेरिका और ईरान की सेनाएं इस इलाके पर नजर रखे हुए हैं। ट्रंप के पास इतनी ताकत थी कि वे चाहते तो कुछ ही मिनटों में ईरान की पूरी अर्थव्यवस्था ठप कर सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।
हथियारों की आपूर्ति पर कड़ी चेतावनी
इससे पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि अगर कोई देश ईरान को हथियार देगा, तो उस पर 50% टैरिफ लगाया जाएगा। यह फैसला तुरंत लागू होगा और इसमें कोई छूट नहीं होगी। फिलहाल समझौते की शर्तों के बारे में स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। यह भी अभी पता नहीं है कि क्या इससे स्थायी शांति स्थापित हो सकती है, क्योंकि दोनों पक्षों ने शर्तों के संबंध में बिल्कुल अलग-अलग दृष्टिकोण प्रस्तुत किए हैं।
युद्धविराम के बीच छिटपुट हमले
युद्धविराम की घोषणा के कुछ घंटों बाद, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने ईरान की ओर से मिसाइल हमले की सूचना दी, और कुवैत की सेना ने कहा कि उसकी सेना ड्रोन हमलों का जवाब दे रही है। वहीं, ईरान ने कहा कि उसकी एक तेल रिफाइनरी पर हमला हुआ है। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने समझौते को एक ‘नाटकीय युद्धविराम’ बताया।
क्षेत्रीय तनाव और प्रतिक्रिया
ईरान ने कहा कि इस समझौते से उसे होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाने की नई व्यवस्था को औपचारिक रूप देने की अनुमति मिल जाएगी, लेकिन समझौते की शर्तें स्पष्ट नहीं हैं। पाकिस्तान, जिसने समझौते में मध्यस्थता करने में मदद की, और अन्य देशों ने कहा कि वे लेबनान में लड़ाई रोक देंगे, जहाँ इजरायल ने ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के खिलाफ जमीनी आक्रमण शुरू किया है। हालांकि, इजरायल ने स्पष्ट किया है कि वह हिजबुल्लाह के खिलाफ हमले जारी रखेगा।
युद्धविराम की घोषणा के बाद ईरान की राजधानी तेहरान की सड़कों पर सरकार समर्थक प्रदर्शनकारियों ने ‘अमेरिका मुर्दाबाद, इजरायल मुर्दाबाद’ के नारे लगाए। आयोजकों ने प्रदर्शनकारियों को शांत करने की कोशिश की लेकिन वे लगातार नारे लगाते रहे। उन्होंने सड़क पर अमेरिकी और इजरायली झंडे भी जलाए।







