4 रुपये किलो में बेची गईं बच्चों की पाठ्यपुस्तकें
शिक्षा विभाग के कर्मचारी समेत कई आरोपी गिरफ्तार
शिक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल?
उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले से शिक्षा व्यवस्था को झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। सरकारी स्कूलों के बच्चों के लिए आई करीब 13 हजार किताबें कबाड़ी के गोदाम से बरामद की गई हैं। ये वही किताबें थीं, जिनसे बच्चों का भविष्य संवरना था, लेकिन उन्हें महज 4 रुपये किलो के भाव से बेच दिया गया।
पुलिस ने छापेमारी कर पूरे मामले का खुलासा किया। जांच में बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय के कर्मचारी आलोक मिश्रा समेत कई लोगों की संलिप्तता सामने आई है। कबाड़ी और अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि कुछ कर्मचारियों को बर्खास्त किया गया है। प्रशासन का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना केवल आर्थिक घोटाला नहीं, बल्कि शिक्षा के साथ सीधा विश्वासघात है। जिन बच्चों को समय पर किताबें मिलनी चाहिए थीं, वे आज भी इंतजार कर रहे हैं। सरकारी योजनाओं का उद्देश्य शिक्षा को मजबूत करना है, लेकिन यदि सिस्टम के भीतर ही भ्रष्टाचार घर कर जाए तो सबसे बड़ा नुकसान छात्रों को उठाना पड़ता है।
शिक्षा किसी भी समाज की रीढ़ होती है। अगर किताबें ही बच्चों तक न पहुंचें, तो उनके सपनों का क्या होगा? यह मामला कई गंभीर सवाल खड़े करता है— निगरानी व्यवस्था पर, जवाबदेही पर और उस सोच पर जो बच्चों के अधिकारों को नजरअंदाज करती है।
आप इस पूरे मामले को कैसे देखते हैं? क्या दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए? अपनी राय कमेंट में जरूर साझा करें और इस खबर को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।








