मुंबई | महाराष्ट्र विधानसभा में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सदस्य सुधीर मुनगंटीवार और विपक्षी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद चंद्र पवार गुट) विधायक जयंत पाटिल ने राज्य महिला आयोग के स्वीकृत बजट और वास्तविक व्यय के बीच कथित विसंगतियों को लेकर सोमवार को मंत्री मेघना बोर्डीकर से जवाब मांगा।
पूर्व मंत्री मुनगंटीवार ने प्रश्नकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग को आवंटित बजट का विवरण मांगा। उन्होंने सवाल किया कि आयोग के व्यय संबंधी प्रस्तावों की फाइलें अनुमोदन के लिए मंत्रालय (सचिवालय) क्यों भेजी जा रही हैं? मुनगंटीवार ने कहा, “यह एक स्वायत्त आयोग है और इसे अपना स्वायत्त दर्जा बनाए रखते हुए अपनी जरूरतों के अनुसार खर्च करने की अनुमति दी जानी चाहिए। राज्य के अधिकारी हर व्यय की फाइल को मंजूरी के लिए मंत्रालय भेजने की मांग क्यों करते हैं? यह अनुचित है। मैं खर्च का पूरा ब्यौरा चाहता हूँ।”
उल्लेखनीय है कि मुनगंटीवार को नवंबर 2024 के विधानसभा चुनावों के बाद राज्य मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया था।
महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री बोर्डीकर ने प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा कि सरकार ने आयोग के लिए कभी धन नहीं रोका और उसकी आवश्यकताओं के अनुसार वित्तीय सहायता प्रदान की है। मंत्री ने बताया कि आयोग ने 2023-24 में 24 करोड़ रुपये की मांग की थी, जिसे जारी कर दिया गया। वर्ष 2026-27 के लिए उसकी मांग के अनुसार ही 18.35 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
हालाँकि, विपक्षी राकांपा विधायक जयंत पाटिल ने मंत्री के बयान का खंडन करते हुए कहा कि सदन में प्रस्तुत आंकड़े वास्तविक रूप से जारी की गई राशि को नहीं दर्शाते। पाटिल ने आरोप लगाया कि मंत्री ने सदन को गलत जानकारी दी है। उनके अनुसार:
वर्ष 2023-24: बजट 15.08 करोड़ का था, लेकिन वास्तव में केवल 4.63 करोड़ रुपये जारी किए गए।
वर्ष 2024-25: 15.28 करोड़ का प्रावधान था, मगर सिर्फ 5.83 करोड़ रुपये दिए गए।
अगले वर्ष: 18.09 करोड़ का प्रावधान था, लेकिन केवल 6.71 करोड़ रुपये जारी किए गए।
मुनगंटीवार ने कहा कि पर्याप्त धनराशि जारी न होने से आयोग के कामकाज, खासकर जागरूकता अभियान और अनुसंधान गतिविधियों पर असर पड़ रहा है। हालाँकि, मंत्री बोर्डीकर ने दोहराया कि धनराशि आवश्यकता के आधार पर जारी की जाती है और मंत्रालय के समक्ष आयोग की ओर से कोई मांग लंबित नहीं है।









