नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हॉर्मुज़ स्ट्रेट (Hormuz Strait) की सुरक्षा के नाम पर चीन और सहयोगी देशों से मदद की अपील की, लेकिन वह इस मुद्दे पर अलग-थलग पड़ते दिख रहे हैं। इसकी वजह यह है कि ऑस्ट्रेलिया और जापान ने नौसैनिक मदद मुहैया कराने से मना कर दिया है व अन्य सहयोगी देशों ने भी कोई प्रतिबद्धता नहीं दिखाई है। ब्रिटेन ने कहा कि वह ईरान युद्ध में नहीं पड़ेगा।
इधर, ट्रंप ने यह चेतावनी दी है कि अगर सहयोगियों ने मदद नहीं की तो नाटो (NATO) को भविष्य में संकट का सामना करना पड़ेगा। उल्लेखनीय है कि पश्चिम एशिया में दो सप्ताह से ज्यादा समय से जारी युद्ध के कारण तेल की कीमतें बढ़ गई हैं, क्योंकि ईरान ने हॉर्मुज़ स्ट्रेट को बंद कर दिया है।
इससे पहले उन्होंने एक इंटरनेट मीडिया पोस्ट कर कहा कि उन्हें उम्मीद है कि चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अन्य देश इसमें शामिल होंगे। न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, ट्रंप ने उन देशों पर दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया है, जिनसे उन्होंने हॉर्मुज़ में युद्धपोत भेजने की अपील की है। उन्होंने फाइनेंशियल टाइम्स को दिए गए एक इंटरव्यू में कहा, “अगर कोई जवाब नहीं आता या नकारात्मक जवाब आता है तो मुझे लगता है कि यह नाटो के भविष्य के लिए बहुत बुरा होगा।”
ट्रंप ने कहा कि खाड़ी की सुरक्षा के लिए चीन को भी मदद के लिए युद्धपोत भेजने चाहिए। रॉयटर्स के मुताबिक, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने कहा कि वे इस महत्वपूर्ण जलमार्ग में जहाजों को एस्कॉर्ट करने के लिए पश्चिम एशिया में नौसैनिक पोत भेजने की योजना नहीं बना रहे हैं।









