लोकवाहिनी संवाददाता,गढ़चिरौली। गुड़ी पड़वा के अवसर पर गढ़चिरौली जिले में बदलाव का तोरण खड़ा किया गया है। नक्सलवाद की हिंसक विचारधारा को त्यागकर लोकतंत्र की मुख्यधारा में शामिल होने का निर्णय लेते हुए, गुरुवार को 11 उग्र नक्सलियों ने जिला पुलिस बल के समक्ष हथियार डाल दिए। इसे 15 अक्टूबर, 2025 को केंद्रीय समिति सदस्य ‘भूपति’ के ऐतिहासिक आत्मसमर्पण के बाद जिले में नक्सलवादी आंदोलन को दिया गया सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है।
पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में इन नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया। इनमें 2 संभागीय समिति सदस्य, 1 क्षेत्रीय समिति सचिव और कमांडर स्तर के वरिष्ठ नेता शामिल हैं। गौरतलब है कि सरकार ने इन 11 लोगों पर 66 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था।
आत्मसमर्पण करने वाले मुख्य नाम:
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सोनी उर्फ बाली मटामी (डिवीजनल – कुरखेड़ा दलम)
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बद्री उर्फ रामबती आयतू मटामी (क्षेत्रीय समिति सचिव – इंद्रावती क्षेत्रीय समिति)
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सुखलाल बोलगा कोकसा (कमांडर – पश्चिम ब्यूरो क्षेत्र टीम)
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शांति उर्फ सोमारी गंगा तलामी (पीपीसीएम – पश्चिम ब्यूरो क्षेत्र टीम)
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यमनिका उर्फ रुक्मिका पोटी पदाम (एसीएम – भामरागढ़ दलम)
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गणेश उईके कोवासी (सदस्य – कंपनी नंबर 10)
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तिन्को उर्फ जमनी कायू मटामी (सदस्य – कंपनी नंबर 10)
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धनु दासरू कमाजू (सदस्य – कंपनी नंबर 10)
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सुनीता उर्फ वरगु वट्टे होयमी (सदस्य – सादा दलम)
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रमेश पांडू मडावी (सदस्य – मोबाइल पॉलिटिकल स्कूल)
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किशोर सक्रया वासम (मिलिशिया कमांडर – सादा दलम)
इन सभी ने हिंसा का मार्ग त्यागकर समर्पण कर दिया। हथियार डालने वाले इन नक्सलियों को सरकार की आत्मसमर्पण योजना के तहत तत्काल आर्थिक सहायता और पुर्नवास योजना का लाभ दिया जाएगा। प्रशासन ने उन्हें उनकी योग्यता के अनुसार रोजगार दिलाने का भी आश्वासन दिया है। पुलिस और विकास प्रक्रिया के बढ़ते दबाव के कारण नक्सलियों की भर्ती सीमित हो गई थी, और अब जब वरिष्ठ नेता भी नक्सली संगठन छोड़ने लगे हैं, तो क्षेत्र में नक्सलवाद के अंत की चर्चा चल रही है।











