नागपुर जिले के देवलापार वन क्षेत्र के दुयापार गांव में तेंदुए के घुसने की घटना ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक तेंदुआ घर से सटे गोशाला में घुसकर करीब छह घंटे तक डटा रहा, जिससे पूरे गांव में दहशत फैल गई।
शनिवार सुबह करीब 11 बजे यह घटना सामने आई, जब जंगल से आया तेंदुआ मनोज सांगोड़े के घर के पास बने गोशाला में घुस गया। घर के बच्चे ने तेंदुए को अंदर जाते देखा और तुरंत परिवार को सतर्क किया। इसके बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई और वन विभाग को सूचना दी गई।
सूचना मिलते ही रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची, लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि तेंदुए को बेहोश करने के लिए लाई गई डार्ट सिस्टम पूरी तरह फेल हो गई। जांच में सामने आया कि डार्ट में इस्तेमाल होने वाली दवाएं एक्सपायर्ड थीं, जिसके कारण पूरी कार्रवाई प्रभावित हुई।
जानकारी के मुताबिक, तेंदुए को काबू में करने के लिए केटामाइन और जाइलाजीन जैसी दवाएं जरूरी होती हैं, लेकिन वन विभाग के पास इनकी उपलब्धता नहीं थी। इससे विभाग की तैयारी और आपातकालीन प्रबंधन पर सवाल उठ रहे हैं।
घटना के बाद यह भी सामने आया कि रेस्क्यू टीम के पशु चिकित्सक और स्थानीय अधिकारियों के बीच समन्वय की कमी थी। यदि दवाएं उपलब्ध नहीं थीं, तो टीम मौके पर क्यों पहुंची, इसका जवाब अभी तक स्पष्ट नहीं है।
इस घटना ने वन्यजीव प्रबंधन और नागरिक सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।











