लोकवाहिनी, संवाददाता:नागपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि जब भी दुनिया संकटों में घिरती है, हमारा राष्ट्र ही उसे उस खतरे से बाहर निकालने का मार्गदर्शन करता है। मानव अस्तित्व पर सच्चा दृष्टिकोण हमारी आध्यात्मिक बुद्धिमत्ता में निहित है। सरसंघचालक ने बताया कि जब भौतिकवाद, संकीर्णता और उपभोक्तावाद के तूफान बाहरी दुनिया से आते हैं, जो अक्सर अन्य समाजों को तबाह कर देते हैं, तो वे लहरें हम पर से गुजर जाती हैं और हम अडिग रहते हैं। उन्होंने इस लचीलेपन का कारण आध्यात्मिक ज्ञान को बताया और इसे संतों का ऋण कहा।
भारत की आध्यात्मिक विरासत और संतों के मार्गदर्शन ने देश को वैश्विक उथल-पुथल का सामना करने तथा संकटों के दौरान दुनिया का मार्गदर्शन करने में सक्षम बनाया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र का लचीलापन उसकी आध्यात्मिक बुद्धिमत्ता में निहित है। भागवत ने यह टिप्पणी नागपुर के तुलसी नगर क्षेत्र में श्री जिनेंद्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के तहत आयोजित सात दिवसीय अनुष्ठान समारोह में की।
भागवत ने कहा कि हिंदू समाज, हमारे राष्ट्र का समाज, धीरे-धीरे खुद को अनुकूलित और बदलने की एक अनूठी क्षमता रखता है। उन्होंने इसका कारण बताया कि हमारे देश के संत, ऋषि और तपस्वी लगातार हमारे समाज की ढाल रहे हैं और उसे तैयार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बाहरी दुनिया भौतिकवाद, संकीर्णता और उपभोक्तावाद के तूफान से बह गई है—ऐसी ताकतें जो अन्य समाजों के विघटन का कारण बनी हैं। फिर भी, हमारे लिए, वह लहर केवल हम पर से गुजर जाती है और हम अपने मूल सार में अडिग रहते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि ग्रीस, मिस्र और रोम धरती से लुप्त हो गए हैं, लेकिन भारत में निश्चित रूप से कुछ खास बात है जो यह सुनिश्चित करती है कि देश का अस्तित्व कभी मिटेगा नहीं। इन संतों से ही गृहस्थ जीवन में आचरण के सही तरीके का सटीक मार्गदर्शन प्राप्त होता है। इसलिए, हमें प्रार्थना करनी चाहिए कि ऐसे संतों का अस्तित्व शाश्वत बना रहे। इसके अलावा, हमारी परंपरा में यह कहा गया है कि केवल संतों की संगति, उनके संग में रहने मात्र से ही व्यक्ति आध्यात्मिक मुक्ति की ओर अग्रसर हो जाता है। इसी में इस परंपरा का सार निहित है।
उन्होंने यह भी कहा, जब तक हमारा राष्ट्र कायम रहेगा, दुनिया में सब कुछ ठीक रहेगा और भारत को शाश्वत भारत के रूप में सुरक्षित करने का कार्य हमारे संतों और ऋषियों की आध्यात्मिक शक्ति के माध्यम से पूरा होता रहेगा। श्री जिनेंद्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के स्थल पर पहुंचकर भागवत ने सर्वप्रथम आचार्य श्री समय सागर महाराज को प्रणाम किया और उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया, जिसके बाद उन्होंने उनसे विभिन्न विषयों पर चर्चा की। इस कार्यक्रम में श्रद्धालुओं और धर्मगुरुओं की भारी उपस्थिति देखी गई।










