नागपुर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को नागपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के दूसरे दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने भावी चिकित्सकों को नवाचार, शोध और सतत सीखने को अपनाने का आह्वान किया। राष्ट्रपति ने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र केवल एक पेशा नहीं, बल्कि संवेदनशीलता के साथ मानवता की सेवा करने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि एक डॉक्टर न केवल बीमारियों का इलाज करता है, बल्कि मरीजों के मन में उम्मीद भी जगाता है। डॉक्टरों की सहानुभूतिपूर्ण सलाह मरीज और उनके परिवार दोनों को शक्ति देती है।
राष्ट्रपति ने कहा कि डॉक्टरों को कठिन परिस्थितियों में भी मरीजों और उनके परिजनों के प्रति संवेदनशीलता बनाए रखनी चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि मरीजों और उनके परिवारों को भी चिकित्सा पेशेवरों के प्रति सम्मान रखना चाहिए, ताकि डॉक्टर और रोगी के बीच विश्वास का संबंध मजबूत बना रहे।
उन्होंने कहा कि नागरिकों का अच्छा स्वास्थ्य राष्ट्र की प्रगति के लिए बहुत जरूरी है। पिछले एक दशक में भारत सरकार द्वारा उठाए गए कदमों से स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा में विस्तार हुआ है। देशभर में नए एम्स की स्थापना से बेहतर इलाज और शिक्षा के अवसर बढ़े हैं। राष्ट्रपति ने खुशी जताई कि स्थापना के कुछ ही वर्षों में एम्स नागपुर ने चिकित्सा शिक्षा और शोध के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है और यह लगातार उत्कृष्टता की दिशा में कार्य कर रहा है।
द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल हेल्थ और उन्नत अनुसंधान के जरिए तेजी से बदलाव आ रहे हैं। इन तकनीकों को अपनाना जरूरी है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट कहा कि प्रौद्योगिकी कभी भी करुणा, ईमानदारी और रोगी-केंद्रित दृष्टिकोण का स्थान नहीं ले सकती।









