लोकवाहिनी, संवाददाता:मुंबई। महाराष्ट्र विधान परिषद की 10 सीटों के लिए इस वर्ष चुनाव निर्विरोध होंगे। कुल 10 सीटों के लिए चुनाव घोषित किए गए थे, जिनमें 9 नियमित सीटें और 1 उपचुनाव शामिल हैं। हालांकि, किसी भी पार्टी ने 11वां उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारा है, इसलिए यह चुनाव निर्विरोध होगा। चुनाव आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार, मतदान 12 मई को होना था। मतदान सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक होना था और परिणाम उसी दिन घोषित किए जाने थे। हालांकि, वर्तमान में यह पुष्टि हो गई है कि सभी 10 उम्मीदवार निर्विरोध चुने जाएंगे। कुछ निर्दलीय उम्मीदवारों ने इस चुनाव में अपने आवेदन दाखिल किए थे।
हालांकि, उनके पास आवश्यक 10 विधायक नहीं होने के कारण, उनके आवेदन खारिज होने की संभावना है। इसलिए, मुख्य मुकाबले से पहले ही नतीजा साफ हो चुका है। विधानसभा की मौजूदा स्थिति के अनुसार, पार्टीवार सीटों का बंटवारा इस प्रकार है: भाजपा को 6 सीटें, शिवसेना (शिंदे समूह) को 2 सीटें, एनसीपी (अजीत पवार समूह) को 1 सीट और महाविकास अघाड़ी (शिवसेना ठाकरे समूह) को 1 सीट। वहीं, भाजपा से सुनील कर्जतकर, माधवी नाईक, संजय भेंडे, विवेक कोल्हे, प्रमोद जठार और प्रज्ञा सातव को मनोनीत किया गया है। वहीं, शिवसेना के शिंदे समूह से नीलम गोहें और बच्चू कडू, एनसीपी के अजीत पवार समूह से जीशान सिद्दीकी और महाविकास अघाड़ी से अंबादास दानवे मनोनीत हुए हैं।
कांग्रेस ने किया शिवसेना (उबाठा) का समर्थन
मुंबई। महाराष्ट्र में अगले महीने होने वाले विधान परिषद चुनाव को लेकर कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को अपना रुख नरम करते हुए उम्मीदवार नहीं उतारने का फैसला किया और सहयोगी दल शिवसेना (उबाठा) के उम्मीदवार अंबादास दानवे का समर्थन करने का ऐलान किया। यह निर्णय दोनों दलों के नेताओं के बीच लंबी बातचीत के बाद लिया गया। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब एक दिन पहले ही महाविकास अघाड़ी (एमवीए) में दरार के संकेत दिखे थे, जब शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और कांग्रेस दोनों ने 12 मई को होने वाले विधान परिषद चुनाव में विपक्ष के खाते में आने वाली एकमात्र सीट पर अपने-अपने उम्मीदवार उतारने की घोषणा की थी।
महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि कांग्रेस की राय थी कि शिवसेना (उबाठा) प्रमुख उद्धव ठाकरे को खुद विधान परिषद चुनाव लड़ना चाहिए। लेकिन जब ठाकरे की पार्टी ने अंबादास दानवे को उम्मीदवार बनाया, तो कांग्रेस ने भी चुनाव लड़ने का फैसला किया था। हालांकि, शिवसेना (उबाठा) नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने सपकाल से मुलाकात कर कांग्रेस को मनाने की कोशिश की। सपकाल ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, हमारा मानना था कि दानवे की उम्मीदवारी पर चर्चा की जरूरत है। अब हम उद्धव जी के फैसले का समर्थन करेंगे और इसे एमवीए का साझा रुख मानेंगे। आने वाले दिनों में हम एमवीए के रूप में भाजपा के खिलाफ लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा हुई, जिसके बाद यह तय हुआ कि विपक्षी गठबंधन आगामी चुनाव एकजुट होकर लड़ेगा।








