लोकवाहिनी, संवाददाता:नागपुर। साइबर पुलिस थाने में बेटिंग ऐप के 500 रुपये की ठगी के मामले की जांच में हुई गड़बड़ी सामने आने के बाद पुलिस आयुक्त डॉ. रवींद्रकुमार सिंघल ने बड़ी कार्रवाई की है। दो पुलिस निरीक्षकों, एक सहायक पुलिस निरीक्षक सहित कुल 6 पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। निलंबित सभी की प्राथमिक और विभागीय जांच भी होगी। पुलिस उपायुक्त (प्रशासन) दीपक अग्रवाल ने इस संबंध में आदेश जारी किया है। तत्काल प्रभाव से निलंबित किए गए लोगों में वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक बलिराम सुतार, योगेश घरे, सहायक पुलिस निरीक्षक विजय राणे, कांस्टेबल सौरभ हिवारकर, श्रीकांत गणोरकर, सुनील चांगोले, सतीश वाघ, अजय पवार और कांस्टेबल प्रफुल्ल ठाकरे शामिल हैं, जिन्हें राणे ने पीटा था।
पिछले एक महीने से शहर की पुलिस साइबर पुलिस स्टेशनों में कथित अनियमितताओं को लेकर सुर्खियों में है। साइबर पुलिस स्टेशन में हिरेन भोजवानी नाम के एक शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत दर्ज कराने के बाद आंतरिक विवाद शुरू हुआ। इस मामले में केस दर्ज होने के बाद साइबर पुलिस स्टेशन की एक टीम जांच के लिए पुणे गई। वहां 14 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। इसी दौरान क्रिकेट सट्टेबाजी के एक नेटवर्क का खुलासा हुआ। यह पता चलने के बावजूद कि एकांश नाम के एक सट्टेबाज ने 40 से अधिक अलग-अलग बैंक खातों से 250 करोड़ रुपये से अधिक का हवाला लेन-देन किया था, टीम ने उसे केवल नोटिस देकर छोड़ दिया। इसी वजह से एकांश फरार हो गया।
इस घटना की जानकारी मिलते ही दूसरे दल के साइबर अधिकारियों ने सोशल मीडिया पर यह जानकारी तेजी से फैला दी। इससे आंतरिक विवाद खड़ा हो गया। इसी दौरान राणे नामक एक सहायक पुलिस सब-इंस्पेक्टर ने हवलदार ठाकरे का मोबाइल फोन छीन लिया और उनकी पिटाई कर दी। ठाकरे ने इसकी शिकायत सीधे संयुक्त पुलिस आयुक्त से की। इसके बाद ठाकरे दो दिनों तक लापता रहे। साइबर शाखा में इस तरह की घटनाएं लगातार सामने आने से पुलिस बल की छवि धूमिल हो रही थी। इसे ध्यान में रखते हुए, पुलिस आयुक्त रवींद्रकुमार सिंघल के आदेश पर, पुलिस उपायुक्त अग्रवाल ने कदाचार के आरोपी अधिकारियों सहित 9 व्यक्तियों के विभागीय जांच के आदेश जारी किए। जांच को प्रभावित न करने के लिए इन 9 व्यक्तियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
क्या है पूरा मामला?
हिरेन तरुण भोजवानी ने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि बेटिंग ऐप के जरिए उनसे 500 रुपये की ठगी हुई है। इस शिकायत पर बलिराम सुतार ने मामला दर्ज किया था। आगे की जांच निरीक्षक योगेश घरे के निर्देशन में एपीआई विजय राणे को सौंपी गई। टीम ने पुणे में एकांश नामक व्यक्ति और उसके कर्मचारियों से पूछताछ की, उसका मोबाइल जब्त कर नोटिस दिया, लेकिन स्टेशन डायरी में इसकी कोई प्रविष्टि नहीं थी। जांच में चौकाने वाला खुलासा हुआ कि एकांश के खाते से दुबई में दो सौ से ढाई सौ करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ था, फिर भी पुलिस टीम ने उसे छोड़ दिया। इस वजह से पुलिस की भूमिका संदिग्ध पाई गई और आर्थिक लेन-देन की आशंका जताई गई।
सहकर्मियों के बीच झगड़े
इस मामले ने दोनों गुटों के बीच खुले टकराव को जन्म दिया। इसकी शुरुआत पिछले सप्ताह हुई थी। इसके चलते एक घटना में एक कथित अधिकारी ने अपने साथी कांस्टेबल ठाकरे का मोबाइल फोन छीन लिया और उसकी पिटाई भी कर दी। कांस्टेबल ठाकरे ने संयुक्त पुलिस आयुक्त के पास शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद कांस्टेबल ठाकरे दो दिनों तक लापता रहे। उनके परिवार द्वारा संबंधित पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराने के बाद वरिष्ठ अधिकारी सतर्क हो हुए।








