भारतीय अर्थव्यवस्था मार्च तिमाही में 7.8 प्रतिशत
लोकवाहिनी, संवाददाता
नई दिल्ली। भारतीय अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2025-26 की जनवरी-मार्च तिमाही में मजबूत घरेलू मांग और सरकारी खर्च के कारण अनुमान से अधिक 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी। हालांकि, इस अवधि के अंत में बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं ने आर्थिक परिदृश्य पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने शुक्रवार को जारी आंकड़ों में यह जानकारी दी। पिछले वर्ष की समान तिमाही में जीडीपी वृद्धि सात प्रतिशत रही थी जबकि अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में यह आठ प्रतिशत थी। वित्त वर्ष 2025-26 की समूची अवधि में देश की आर्थिक वृद्धि दर बढ़कर 7.7 प्रतिशत हो गई, जो 2024-25 में 7.1 प्रतिशत रही थी। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी-मार्च तिमाही में सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) 7.9 प्रतिशत बढ़ा, जो यह दर्शाता है कि वृद्धि केवल मांग पर आधारित नहीं थी, बल्कि उत्पादन में मजबूती भी रही। विनिर्माण, निर्माण एवं सेवा क्षेत्रों के बेहतर प्रदर्शन ने अर्थव्यवस्था को सहारा दिया।
आरबीआई ने रेपो को 5.25 प्रतिशत पर रखा बरकरार
भारतीय रिजर्व बैंक ने वैश्विक स्तर पर जारी अनिश्चितता के बीच महंगाई बढ़ने के जोखिम को देखते हुए शुक्रवार को नीतिगत दर रेपो को उम्मीद के मुताबिक 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा। इसके साथ ही चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि के अनुमान को घटाकर 6.6 प्रतिशत और खुदरा मुद्रास्फीति के अनुमान को बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया है। रेपो वह ब्याज दर है, जिस पर वाणिज्यिक बैंक अपनी तात्कालिक जरूरतों को पूरा करने के लिये केंद्रीय बैंक से कर्ज लेते हैं। आरबीआई के रेपो दर को यथावत रखने के फैसले से आवास, वाहन और वाणिज्यिक कर्ज की मासिक किस्त जस-की-तस बने रहने की संभावना है।












