विप चुनाव : नामांकन वापसी पर कांग्रेस की बड़ी कार्रवाई
लोकवाहिनी, संवाददाता |
यवतमाल। महाराष्ट्र में जारी विधान परिषद चुनाव के बीच कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों द्वारा नामांकन वापस लेने के मामले में सख्त कदम उठाया है। पार्टी ने यवतमाल से उम्मीदवार साहेबराव कांबले और चंद्रपुर से उम्मीदवार शैलेश अग्रवाल को पार्टी से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्द्धन सपकाल के निर्देश पर की गई है। यवतमाल विधान परिषद चुनाव में नामांकन वापसी की घटनाओं ने पूरे राज्य का ध्यान अपनी ओर खींचा। चुनाव मैदान में मौजूद पांच उम्मीदवारों में से चार के नामांकन वापस लेने से यह चुनाव राजनीतिक रूप से बेहद चर्चित बन गया। महाविकास आघाड़ी के उम्मीदवार साहेबराव कांबले, भाजपा के बागी उम्मीदवार नितिन भूतड़ा, अजित पवार गुट के साजिद बेग तथा निर्दलीय उम्मीदवार सैयद फारूक द्वारा नामांकन वापस लेने के बाद शिवसेना (शिंदे गुट) के उम्मीदवार दुष्यंत चतुर्वेदी निर्विरोध निर्वाचित हो गए।
साहेबराव कांबले ने 3 जून को अपना नामांकन वापस लेते हुए पर्याप्त मतदाता समर्थन नहीं होने का कारण बताया। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में उनके फैसले को लेकर कई तरह की चर्चाएं होती रहीं। वहीं, महाविकास आघाड़ी समर्थित माने जा रहे सैयद फारूक ने भी अपना नामांकन वापस ले लिया। भाजपा के बागी उम्मीदवार नितिन भूतड़ा ने नामांकन वापसी से पहले मुंबई में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, प्रदेशाध्यक्ष रवींद्र चव्हाण तथा चंद्रशेखर बावनकुले से मुलाकात की थी। इसके बाद उन्होंने पूर्व मंत्री मदन येरावर के साथ पहुंचकर गठबंधन धर्म का हवाला देते हुए अपना नामांकन वापस ले लिया। इस बीच, साहेबराव कांबले के नामांकन वापस लेने के बाद महाविकास आघाड़ी के नेताओं ने कांग्रेस नेता माणिकराव ठाकरे के निवास पर बैठक की। बैठक के दौरान ही सैयद फारूक ने भी जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर अपना नामांकन वापस ले लिया। वहीं, महायुति के सहयोगी दल राकांपा अजित पवार गुट के साजिद बेग ने भी कथित तौर पर राज्य मंत्री इंद्रनील नाईक के निर्देश पर चुनाव मैदान से हटने का निर्णय लिया। साहेबराव कांबले के नामांकन वापसी के बाद महाविकास आघाड़ी कार्यकर्ताओं ने यवतमाल के दत्ता चौक में उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी किया। प्रदर्शनकारियों ने लोकतंत्र की अवहेलना और धनबल के इस्तेमाल जैसे आरोप लगाते हुए नाराजगी व्यक्त की।
संजय राठौड़ की भूमिका पर चर्चा
इन राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद यवतमाल जिले के पालकमंत्री संजय राठौड़ की भूमिका भी चर्चा का विषय बनी हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विभिन्न दलों के उम्मीदवारों के नामांकन वापस लेने के पीछे हुई रणनीतिक गतिविधियों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही हो सकती है। हालांकि नामांकन वापसी के अंतिम दिन हुई राजनीतिक गतिविधियों को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जिले में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि पूरी चुनावी रणनीति को सफलतापूर्वक अंजाम देने में यवतमाल के पालकमंत्री संजय राठौड़ की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिसके परिणामस्वरूप यह चुनाव निर्विरोध संपन्न हुआ।
कांग्रेस के लिए बड़ा झटका
यवतमाल और चंद्रपुर दोनों क्षेत्रों में कांग्रेस उम्मीदवारों के नामांकन वापस लेने और बाद में उनके निलंबन ने पार्टी के भीतर संगठनात्मक चुनौतियों को उजागर किया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस घटनाक्रम का असर आगामी स्थानीय स्वराज्य संस्था चुनावों और अन्य राजनीतिक मुकाबलों पर भी पड़ सकता है।










