आज की दौड़भाग वाली जिंदगी में परिवार के साथ वक्त बिताना, रिश्तेदारों और दोस्तों को समय देना उनके साथ मेल-मिलाप करना अब हमारे लिए एक तरह का टास्क हो गया है। इस मुश्किल भरी जिंदगी में काम और निजी जीवन के बीच संतुलन बनाना सबसे कठिन कामों में से एक बन गया है। लेकिन जिंदगी सिर्फ ऑफिस की डेडलाइन और मीटिंग को पूरा करने तक ही सीमित नहीं है। काम के साथ निजी जीवन का संतुलन सिर्फ एक शब्द नहीं है, यह हर व्यक्ति के लिए बेहतर जीवन की कुंजी है।
आज के समय में दिन के चौबिस घंटे भी कम पड़ते है। इस भागदौड़ भरी ज़िंदगी में काम और निजी जीवन के बीच संतुलन बनाना सबसे कठिन कामों में से एक बन गया है। सुबह अलार्म की घंटी के साथ उठना। घर के काम और परिवार की जरुरत पूरी कर ऑफिस जल्दी पहुंचने की गड़बड़ी और समय पर वर्क पूरा करने की होड़, उसके बाद वापिस घर पहुंचते ही घर के काम कतार में हमारी बाट जोतते है। इन सबमें हम कब खुद से दूर होते जा रहे है, हमें पता ही नहीं चलता और उसके बाद परिवार के साथ वक्त बिताना, रिश्तेदारों और दोस्तों को समय देना उनके साथ मेल-मिलाप, उनके सुख-दुख में शामिल होना अब हमारे लिए एक तरह का टास्क हो गया है। इस मुश्किल भरी जिंदगी में काम और निजी जीवन के बीच संतुलन बनाना सबसे कठिन कामों में से एक बन गया है।
लेकिन जिंदगी सिर्फ ऑफिस की डेडलाइन और मीटिंग को पूरा करने तक ही सीमित नहीं है। काम के साथ निजी जीवन का संतुलन सिर्फ एक शब्द नहीं है, यह हर व्यक्ति के लिए बेहतर जीवन की कला है। जब मैं काम से लौटती हूं तो परिवार पहले मेरे बारे ही पूछते है। आज का दिन कैसा रहा? ज्यादा थक गई हो तो थोड़ा आराम कर लो। पूछे गए प्यार के इन शब्दों से ही मेरी आधी थकान दूर हो जाती है। बिना किसी स्वार्थ के वे हमारे लिए हमेशा खड़े रहते है। वो हमारे लिए मोरल सपोर्टर साबित होते है।
इसलिए मैं अधिकतर ऑफिस के काम घर पर नहीं करती। छूट्टी के दिन बच्चों के साथ हंसी-ठिठोली करना, उनके साथ खेलना किसी दैविय अनुभव से कम नहीं होता। रिश्तोंदारों और दोस्तों के साथ अपनी दिनचर्या बांटना और उनकी हंसी खुशी में साथ देना ही जीवन है। अगर इंसान काम में इतना डूब जाए कि अपने लिए और परिवार के लिए समय ही न निकाल पाए, तो धीरे-धीरे तनाव, थकान और असंतोष बढ़ने लगता है।
परिवार ही है हमारी असली ताकत
जब हम थके होते हैं, परेशान होते हैं या किसी उलझन में होते हैं, तो सबसे पहले हमें सहारा कौन देता है? जवाब है- हमारा परिवार। मां-बाप, लाइफ पार्टनर और बच्चे… जी हां, ये वो लोग हैं जो बिना किसी स्वार्थ के हमारे साथ खड़े रहते हैं। इसलिए जरूरी है कि हम उनके साथ भी उतना ही वक्त बिताएं, जितना हम अपनी नौकरी या बिजनेस को देते हैं। घर में साथ बैठकर खाना खाना, बच्चों के साथ खेलना, बुजुर्गों की बातें सुनना- ये सब छोटी चीजें लगती हैं, लेकिन यही लम्हें हमें सुकून और एनर्जी देते हैं।
काम और निजी जिंदगी के बीच संतुलित तालमेल से ही मानसिक और तनाव को कम करना आसान हो जाता है। इसलिए परिवार के साथ समय बिताना हमारी मानसिक थकान को तो मिटाता ही है, बल्कि तनाव को भी कम करता है। वहीं रिश्तों को मजबूत मनाना आसान हो जाता है।
काम और निजी जीवन के बीच संतुलन से ही काम करने की क्षमता और रचनात्मकता निखरती है। जब भी मैं छूट्टी बीताकर काम पर लौटती हूं तो एक नयी उर्जा मेरे साथ होती है। परिवार के साथ घर में साथ बैठकर खाना खाना, बच्चों के साथ खेलना, बुजुर्गों की बातें सुनना- ये सब छोटी चीजें लगती हैं, लेकिन यही लम्हें हमें सुकून और एनर्जी देते हैं। जिसके बाद काम पर लौटना एक सुखद एहसास देता है। वहीं हमारे काम में भी सुधार और नयी उर्जा दिखाई देती है।
वर्क-लाइफ बैलेंस को बनाना इतना भी मुश्किल काम नहीं है
इसके लिए हमें काम और आराम के बीच की सीमा को तय करना होगा। जब भी हम घर पर हो तो लैपटॉप या मोबाइल से दूरी बना लें। परिवार के साथ हॉल में बैठकर टीवी देखना या दोस्तों के साथ घूमने के दौरान मोबाइल या लैपटॉप पर ऑफिस के काम से ब्रेक लेना वर्क और लाइफ में अच्छा संतुलन हो सकता है।
काम के दौरान बीच बीच में छोटे-छोटे ब्रेक लेना एक अच्छा उपाय है। जिससे हमारे काम में तनाव नहीं होगा। वहीं शरीर पर इसका दुष्प्रभाव नहीं होगा।
जब भी घर पर हो तो देर रात मोबाइल चलाने की आदत से तौबा कर ले। काम तो सुबह भी हो सकते हैं, लेकिन समय पर नींद नहीं लेने पर इसका कुप्रभाव हमारे शरीर के साथ- साथ दिमागी स्वास्थ्य पर पड़ता है। जिसका असर काम यानी वर्क पर पड़ता है। हर दिन व्यायाम करने से शरीर और मानसिक हेल्थ ठीक होता है।
परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताएं
वर्क-लाइफ बैलेंस सिर्फ़ एक ट्रेंड नहीं बल्कि एक स्वस्थ और खुशहाल जीवन की कुंजी है। अगर हम सही तरीके से अपने समय और ऊर्जा का उपयोग करें, तो न केवल काम में सफलता मिलेगी बल्कि जीवन का असली आनंद भी।
– वंदना हरि महतो (पत्रकार)








