पटना (बिहार) राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मानसिक स्वास्थ्य और प्रशासनिक क्षमता पर रविवार को तीखे सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री का “असामान्य व्यवहार” उनकी मानसिक स्थिति और सरकार चलाने की क्षमता पर नए संदेह पैदा करता है।
पूर्व उपमुख्यमंत्री और वर्तमान में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी ने अपने सोशल मीडिया ‘एक्स’ हैंडल पर कार्यक्रम का एक वीडियो साझा किया, जिसमें नीतीश कुमार अपने आवास से डिजिटल रूप से शामिल हुए थे। वीडियो में मुख्यमंत्री अपने कंप्यूटर स्क्रीन की ओर हाथ जोड़े दिखाई दिए, जबकि उस समय उपमुख्यमंत्री और भाजपा नेता सम्राट चौधरी भाषण दे रहे थे।
तेजस्वी ने पोस्ट में लिखा, “क्या मुख्यमंत्री की इस मानसिक स्थिति के लिए उनके सहयोगी जिम्मेदार हैं जो भाजपा के इशारे पर उनके खाने में कुछ मिला रहे हैं?” उन्होंने संवाददाताओं से कहा, “काफी समय से मुख्यमंत्री का व्यवहार असामान्य दिखाई दे रहा है। उन्होंने मेरी मां राबड़ी देवी, जो स्वयं पूर्व मुख्यमंत्री हैं, के अलावा आम तौर पर महिलाओं के बारे में भी अनुचित टिप्पणी की है। एक बार तो राष्ट्रगान के दौरान भी कैमरे में अनुचित हरकतें करते पकड़े गए थे।”
राजद नेता ने आरोप लगाया, “स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री अब सरकार चलाने की स्थिति में नहीं हैं। एक ‘सिंडिकेट’ सरकार चला रहा है और जल्द ही यह बेनकाब होगा।”
इस टिप्पणी पर जनता दल (यूनाइटेड) के प्रवक्ता और विधान परिषद सदस्य नीरज कुमार ने पलटवार किया। उन्होंने कहा, “नीतीश कुमार वही नेता हैं जिन्होंने बिहार की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक सेहत को बहाल किया। तेजस्वी यादव को अपने पिता और राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद के स्वास्थ्य की चिंता करनी चाहिए, जो वास्तव में बीमार हैं।”
तेजस्वी ने भाजपा और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय द्वारा लालू और राबड़ी के शासनकाल को ‘जंगलराज, भ्रष्टाचार और अपराध’ से जोड़ने के आरोप को भी खारिज किया। उन्होंने कहा, “भाजपा पिछले 20 वर्षों से राज्य की सत्ता में साझेदार रही है। उसने कुछ भी हासिल नहीं किया और न ही भविष्य के लिए कोई दृष्टि है, इसलिए वह अपने विरोधियों को बदनाम करने में लगी है।”
तेजस्वी यादव की इस टिप्पणी ने बिहार की राजनीतिक हलचल को और बढ़ा दिया है और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के स्वास्थ्य व प्रशासनिक क्षमता पर नई बहस को जन्म दिया है।











