नई दिल्ली। तेजी से बढ़ते ‘जनरेटिव एआई’ (Generative AI) के प्रभाव को देखते हुए शिक्षाविदों ने चेतावनी दी है कि लोगों को प्रौद्योगिकी को “गुरु” नहीं, बल्कि एक “सहायक उपकरण” के रूप में देखना चाहिए। उनका कहना है कि शिक्षा जगत में एआई का इस्तेमाल विवेकपूर्ण होना चाहिए और बच्चों के स्तर पर इसके दुष्प्रभावों से बचाने की जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है।
एआई के खतरे और अवसर पर चर्चा
‘ह्यूमन फर्स्ट, टेक फॉर्वर्ड: द न्यू बैलेंस इन एजुकेशन’ विषय पर आयोजित एसटीटीएआर ग्लोबल एजुकेशन कॉन्फ्रेंस में शिक्षाविदों ने जनरेटिव एआई के बढ़ते प्रभाव पर मंथन किया। इस तकनीक की ताकत यह है कि यह विशाल डेटा से सीखकर नई और मौलिक सामग्री तैयार कर सकती है- चाहे वह टेक्स्ट हो, चित्र, संगीत, वीडियो या कोड।
लेकिन विशेषज्ञों ने जोर देकर कहा कि तकनीक को बिना नियंत्रण के अपनाना मानवता के लिए चुनौती बन सकता है।
“प्रौद्योगिकी जरूरी है, लेकिन सावधानी के साथ”
सीबीएसई में कौशल शिक्षा एवं प्रशिक्षण के निदेशक विश्वजीत साहा ने कहा,
“जब प्रौद्योगिकी हावी होने लगती है, तो यह मानवता के लिए खतरा बन जाती है। प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल आवश्यक है, लेकिन जिम्मेदारी और सावधानी के साथ। माता-पिता को अपने बच्चों को यही सिखाना होगा।”
एआईसीटीई प्रमुख को सम्मान
अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) के अध्यक्ष टीजी सीताराम ने कहा कि तकनीकें आती-जाती रहेंगी, लेकिन उनका उपयोग हमेशा सही दिशा में होना चाहिए। उन्हें सम्मेलन में ‘शिक्षा गरिमा पुरस्कार’ से भी सम्मानित किया गया।
उन्होंने उच्च शिक्षा में बढ़ती भागीदारी का उल्लेख करते हुए कहा, “एक दौर था जब सिर्फ 1% लोग ही उच्च शिक्षा पाते थे। कुछ साल पहले यह आंकड़ा 11% तक पहुंचा और मेरा मानना है कि 2035 तक यह 50% तक होगा।”
एकाग्रता और डिजिटल युग की चुनौती
‘सेठ आनंदराम ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस’ के चेयरमैन शिशिर जयपुरिया ने कहा कि डिजिटल युग में लोग एकाग्रता की कमी से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा, “हमें समय के साथ प्रौद्योगिकी को अपनाना होगा, लेकिन साथ ही उसे मानवीय रूप देना भी आवश्यक है।”
शिक्षकों के लिए मददगार हो सकता है एआई
‘गूगल फॉर एजुकेशन इंडिया’ के प्रमुख संजय जैन ने कहा कि असली सवाल यह है कि हम एआई का इस्तेमाल कैसे कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, “एआई शिक्षकों के लिए मूल्यवान है, क्योंकि यह पिछड़ रहे छात्रों का आकलन कर उन्हें अपने साथियों के बराबर लाने में मदद कर सकता है।”
“प्रौद्योगिकी गुरु नहीं, एक सहायक है”
सामर्थ्य शिक्षक प्रशिक्षण अनुसंधान अकादमी (STTAR) के अध्यक्ष विनोद मल्होत्रा ने सार्थक निष्कर्ष प्रस्तुत करते हुए कहा,
“प्रौद्योगिकी गुरु नहीं है, यह एक शानदार सहायक है।”











