मुंबई। भारतीय नौसेना ने जटिल समुद्री अभियानों में सहायता के लिए पोत ‘आईएनएस निपुण’ को अपने बेड़े में शामिल किया जो समुद्र की गहराई में जाने में सक्षम है। इसके शामिल होने से नौसेना गोताखोरी अभियानों से जुड़ी विशेष क्षमताओं में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है, जो दुनिया की कुछ ही नौसेनाओं के पास उपलब्ध हैं। अधिकारियों ने बताया कि पिछले साल ‘आईएनएस निस्तार’ के शामिल होने के बाद ‘आईएनएस निपुण’ भारतीय नौसेना में शामिल किया गया इस श्रेणी का दूसरा पोत है। इसे मुंबई में नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन की उपस्थिति में नौसेना में शामिल किया गया। अधिकारियों के अनुसार, अपने सहयोगी पोत ‘आईएनएस निस्तार’ के साथ ‘आईएनएस निपुण’ नौसेना की विशेष गोताखोरी, पनडुब्बी बचाव सहायता क्षमताओं को काफी मजबूत करेगा। आईएनएस निपुण को नौसेना में शामिल किए जाने के बाद एडमिरल स्वामीनाथन ने कहा कि यह ऐसी कई विशिष्ट क्षमताओं को एक साथ लाता है, जो दुनिया की कुछ ही नौसेनाओं के पास हैं।
नौसेना ने बताया कि यह पोत 300 मीटर तक की गहराई में गोताखोरी अभियानों में सहायता कर सकता है। इसमें पनडुब्बियों को तत्काल बचाव सहायता देने की क्षमता भी है। इसके अलावा, इसे आपदा राहत और मानवीय सहायता अभियानों में भी तैनात किया जा सकता है। विशाखापत्तनम स्थित हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित यह पोत 119.4 मीटर लंबा है और इसकी भारवहन क्षमता 10,500 टन है। निपुण’ एक विशेष पोत है जिसे गोताखोरी और गहरे समुद्र में अभियान सहायता के लिए तैयार किया गया है। यह आधुनिक गोताखोरी प्रणालियों और जलमग्न बचाव क्षमताओं से सुसज्जित है, जो समुद्र में चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम करने वाले गोताखोरों को निरंतर सहायता प्रदान करने में सक्षम है। नौसेना के अनुसार यह पोत नौवहन, प्लेटफार्म प्रबंधन और सटीक स्थिति निर्धारण की आधुनिक प्रणाली से युक्त हैं। साथ ही इसमें गोताखोरी, पानी के नीचे बचाव और चिकित्सा सहायता की विशेष सुविधाएं मौजूद हैं।
नौसेना ने कहा कि आईएनएस निपुण का प्रतीक चिह्न और आदर्श वाक्य उसकी विशिष्ट भूमिका तथा समुद्र की गहराइयों में उतरने वाले नौसैनिकों के जज्बे को दर्शाते हैं। इसका आदर्श वाक्य ‘फार बिनीथ, फ્યૂ बियोंड’ समुद्री क्षेत्र के सबसे चुनौतीपूर्ण वातावरण में काम करने के लिए जरूरी संकल्प, कौशल और धैर्य को अभिव्यक्त करता है। एडमिरल स्वामीनाथन ने कहा, निपुण दुनिया के सबसे कठिन माहौल में जटिल जलमग्न अभियानों को संचालित करने और आपात स्थितियों से निपटने के लिए विशेष क्षमता प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि पनडुब्बी बचाव एक ऐसा क्षेत्र है, जहां तैयारियों में देरी की बहुत कम गुंजाइश होती है। नौसेना प्रमुख ने कहा, निपुण में भारतीय नौसेना के गहरे जलमग्न बचाव पोत को साथ ले जाने और उसे संचालित करने की क्षमता है। इससे संकट में फंसी पनडुब्बी को बचाने की हमारी क्षमता काफी मजबूत होती है- चाहे वह हमारी अपनी पनडुब्बी हो या किसी मित्र नौसेना की। यह क्षमता भारत को पनडुब्बी बचाव अभियानों में सहायता करने और क्षेत्र में ‘पसंदीदा पनडुब्बी बचाव साझेदार’ के रूप में उभरने में भी सक्षम बनाएगी।













