नई दिल्ली। मध्यप्रदेश और राजस्थान में कथित रूप से संदूषित कफ सिरप के सेवन से बच्चों की मौत के बाद केंद्र सरकार हरकत में आ गई है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने जोखिम आधारित निरीक्षण अभियान शुरू करते हुए देश के छह राज्यों हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात, तमिलनाडु, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में स्थित 19 दवा निर्माण इकाइयों की जांच शुरू कर दी है। यह कार्रवाई खांसी की दवाओं, एंटीपायरेटिक्स और एंटीबायोटिक्स समेत कई औषधियों की गुणवत्ता को परखने के लिए की जा रही है।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने शनिवार को बताया कि 3 अक्टूबर से शुरू हुए इन निरीक्षणों का उद्देश्य उन तकनीकी और प्रक्रिया संबंधी कमियों की पहचान करना है, जिनके कारण दवाओं की गुणवत्ता पर असर पड़ा हो सकता है। मंत्रालय के अनुसार, इस जांच के बाद ऐसी घटनाओं को दोबारा रोकने के लिए सुधारात्मक कदम सुझाए जाएंगे।
इस बीच, राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (NIV), भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR), राष्ट्रीय पर्यावरण इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान (NEERI), CDSCO, और एम्स-नागपुर के विशेषज्ञों की एक बहु-विषयक टीम भी मैदान में सक्रिय है। यह टीम मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा और आसपास के इलाकों में हुई बच्चों की मौत के कारणों का पता लगाने के लिए विभिन्न नमूनों और पर्यावरणीय कारकों का विश्लेषण कर रही है।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि CDSCO द्वारा जांचे गए छह दवा नमूनों और मध्यप्रदेश खाद्य एवं औषधि प्रशासन (MPFDA) द्वारा जांचे गए तीन नमूनों में डायथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) और एथिलीन ग्लाइकॉल (EG) जैसे खतरनाक संदूषक नहीं पाए गए। ये दोनों रसायन गुर्दों को गंभीर नुकसान पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं।
हालांकि मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, अब तक जांचे गए नमूने उन दो संदिग्ध कफ सिरपों के नहीं थे, जिनमें से एक “कोल्ड्रिफ” है, जो जांच के दायरे में है। एक अधिकारी ने बताया कि CDSCO द्वारा जांचे गए नमूनों में एंटीबायोटिक्स, एंटीपायरेटिक्स और ओंडान्सेट्रॉन समेत कई दवाएं शामिल थीं, जिन्हें छिंदवाड़ा जिले में बीमार बच्चों ने सेवन किया था।
वहीं, मध्यप्रदेश राज्य औषधि प्रशासन द्वारा “कोल्ड्रिफ” और अन्य संदिग्ध कफ सिरप के नमूनों की जांच अब भी जारी है। राज्य सरकार के अनुरोध पर तमिलनाडु खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने कांचीपुरम स्थित श्रीसन फार्मा की निर्माण इकाई से लिए गए “कोल्ड्रिफ” सिरप के नमूनों की जांच की। मंत्रालय के अनुसार, शुक्रवार देर शाम प्राप्त रिपोर्ट में इन नमूनों में DEG की मात्रा स्वीकार्य सीमा से अधिक पाई गई।
रिपोर्ट आने के बाद तमिलनाडु सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए कफ सिरप की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया और बाजार से इसे वापस मंगाने का आदेश दिया। स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि “1 अक्टूबर से राज्य में इस कंपनी द्वारा निर्मित कफ सिरप की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित कर दी गई है।”








