उम्मीदवार प्रधान गिरफ्तार, हटीं ममता की प्रत्याशी
लोकवाहिनी, संवाददाता नंदीग्राम। पश्चिम बंगाल में उपचुनाव से 18 दिन पहले नंदीग्राम में शुक्रवार को सुबह, दोपहर, शाम तक खेला देखा गया। तृणमूल के दोनों धड़ों को सिंबल मिलने के बाद ममता गुट की प्रत्याशी ने नाम वापस लिया तो ममता बनर्जी ने कांग्रेस को समर्थन देते ही उम्मीदवार को गिरफ्तार की खबर सामने आयी। पश्चिम बंगाल में उपचुनाव से 18 दिन पहले ममता गुट की महिला कैंडिडेट संचिता प्रधान डे ने शुक्रवार को नंदीग्राम सीट से नामांकन वापस ले लिया है। संचिता ने इससे पहले बंगाल सीएम शुभेंदु से मुलाकात की थी। हालांकि रेजीनगर से रबीउल आलम चौधरी मैदान में बने रहेंगे। ममता ने 13 सितंबर को दोनों कैंडिडेट के नामों की घोषणा की थी। इसके बाद ममता ने नंदीग्राम में कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को समर्थन देने की बात कही। पश्चिम बंगाल कांग्रेस ने दावा किया कि इसके 2 घंटे बाद बंगाल पुलिस ने मिलन को एक पुराने केस में अरेस्ट कर लिया। नंदीग्राम सीट मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने खाली की थी। रेजीनगर सीट हुमायूं कबीर के इस्तीफे के बाद खाली हुई। दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर को चुनाव होगा, रिजल्ट 9 अक्टूबर को आएगा।
नंदीग्राम के कांग्रेस प्रत्याशी गिरफ्तार
पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव से पहले शुक्रवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। कांग्रेस के उम्मीदवार मिलन प्रधान को एक पुराने कथित हत्या मामले में गिरफ्तार कर लिया गया। खास बात यह है कि गिरफ्तारी से कुछ घंटे पहले ही ममता बनर्जी ने नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी को समर्थन देने का ऐलान किया था। ममता बनर्जी ने कहा था कि उनका गुट कांग्रेस उम्मीदवार का समर्थन करेगा और इस फैसले का उद्देश्य विपक्षी गठबंधन को मजबूत करना है। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब नंदीग्राम में छह अक्टूबर को उपचुनाव होना है। कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को पश्चिम बंगाल में एक पुराने कथित हत्या मामले के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तारी की खबर ममता बनर्जी की प्रेस कांफ्रेंस के कुछ घंटे बाद सामने आई। ममता ने शुक्रवार को अपने कालीघाट स्थित आवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस प्रत्याशी को समर्थन देने की घोषणा की थी। इस तरह एक ही दिन में नंदीग्राम चुनाव को लेकर दो बड़े घटनाक्रम सामने आए। एक तरफ कांग्रेस को ममता के गुट का समर्थन मिला, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस प्रत्याशी की गिरफ्तारी हो गई।
ममता गुट की प्रत्याशी ने नामांकन लिया वापस
पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम सीट पर होने वाले उपचुनाव से पहले ममता बनर्जी को एक और बड़ा झटका लगा है। संचिता प्रधान (डे) ने नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव से अपना नामांकन वापस ले लिया है। उन्होंने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट, ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस की उम्मीदवार के तौर पर अपना नामांकन दाखिल किया था। उन्होंने एक दिन पहले ही मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की थी। ममता टीएमसी, सिंबल फुटबॉल प्लेयर, बागी गुट डेमोक्रेटिक टीएमसी कहलाएगा
वोट चोरी, सरकार चोरी और अब पार्टी चोरी
नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को कहा कि तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगाए जाने का मुद्दा सिर्फ पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह हर उस राजनीतिक दल और मतदाता की लड़ाई है जो स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव चाहता है। उन्होंने यह दावा भी किया ‘वोट चोरी। सरकार चोरी। अब पार्टी चोरी, ये हमारे लोकतांत्रिक पतन के प्रतीक बन गए हैं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि यह लड़ाई सिर्फ ममता बनर्जी की नहीं है। यह हर राजनीतिक दल, हर मतदाता की लड़ाई है जो स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव चाहता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी और निर्वाचन आयोग मिलकर राजनीतिक दलों को तोड़ने तथा उनका चुनाव छीनने का काम कर रहे हैं।
न हम सिर झुकाएंगे, न ही हार मानेंगे : ममता
चुनाव आयोग के फैसले पर ममता ने कहा- EC मेरी पार्टी का वह चुनाव चिह्न कैसे फ्रीज कर सकता है जो 28 साल से हमारे पास है। ना तो हम सिर झुकाएंगे और ना ही हार मानेंगे; हम लड़ेंगे और वापसी करेंगे। टीएमसी के बागी भाजपा की ‘ए-टीम’ हैं; जो लोग हमारे चुनाव चिह्न पर चुने गए थे, वे ही अब इसे चुनौती दे रहे हैं। ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के फैसले को असंवैधानिक, गैरकानूनी और अलोकतांत्रिक बताया है। हम संवैधानिक पद का सम्मान नहीं करते ऐसा नहीं है, लेकिन हमें लगता है कि आज हमारे लोकतांत्रिक इतिहास का काला दिन है। हमारे देश में जो हो रहा है, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण, असंवैधानिक, गैरकानूनी और अलोकतांत्रिक है। यह एक राजनीतिक दल के अहंकार को संतुष्ट करने के लिए पूरी तरह पक्षपातपूर्ण बदले की कार्रवाई है। उन्होंने आगे कहा, उन्होंने पहले ही कह दिया था कि नाम भी नहीं रखने दूंगा और निशान भी नहीं रखने दूंगा। ये लोग कौन हैं? आज वे सत्ता में हैं, कल सत्ता में नहीं भी हो सकते हैं। उन्हें अपनी सीमाएं समझनी चाहिए।














