पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले में आए विनाशकारी भूस्खलन में मृतकों की संख्या बढ़कर 28 हो गई है, जबकि कई लोग अब भी लापता हैं और सैंकड़ों पर्यटक पहाड़ी इलाकों में फंसे हुए हैं। अधिकारियों के अनुसार लगातार हो रही भारी बारिश और पहाड़ी क्षेत्रों में मलबा बहने की वजह से बचाव कार्य चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। उत्तर बंगाल विकास मंत्री उदयन गुहा ने बताया कि रात भर में कई शव बरामद किए गए हैं और मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका बनी हुई है। पिछले 12 घंटों में 300 मिमी से अधिक बारिश के कारण दार्जिलिंग की पहाड़ियों और तलहटी के डुआर्स क्षेत्र में व्यापक तबाही मची है। सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में दार्जिलिंग के मिरिक, सुखियापोखरी और जोरेबंगलो तथा जलपाईगुड़ी जिले का नागराकाटा शामिल हैं। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीमें 40 से अधिक भूस्खलन स्थलों पर मलबा हटाने और फंसे लोगों की तलाश में दिन-रात काम कर रही हैं। भारी मशीनरी का इस्तेमाल कर मलबे के नीचे फंसे लोगों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। जिला प्रशासन ने गोरखालैंड प्रादेशिक प्रशासन (GTA) और स्थानीय एनजीओ के सहयोग से राहत शिविर स्थापित किए हैं और सभी विस्थापित परिवारों को भोजन, कंबल, दवाइयां और पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है।
दार्जिलिंग पहाड़ियों में कई बस्तियों का सड़क संपर्क अब भी टूटा हुआ है, ढलान धंस गए हैं, पुल बह गए हैं और सड़कों का बड़ा हिस्सा कीचड़ में दबा हुआ है। कुछ अंदरूनी गांवों तक पहुँचने के लिए हेलीकॉप्टर की जरूरत पड़ सकती है। सिलीगुड़ी जाने वाली मुख्य सड़कें अवरुद्ध होने के कारण दुर्गा पूजा की छुट्टियों में पहाड़ों पर गए सैकड़ों पर्यटक फंसे हुए हैं, जिन्हें वैकल्पिक मार्गों से सुरक्षित बाहर निकालने के प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की, साथ ही पीड़ित परिवारों के एक सदस्य को होम गार्ड की नौकरी देने की भी घोषणा की। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मंगलवार सुबह तक दार्जिलिंग, कलिम्पोंग, जलपाईगुड़ी और कूचबिहार जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है और सतर्क रहने की चेतावनी दी है। संतृप्त मिट्टी और लगातार हो रही बारिश के कारण फिर से भूस्खलन का खतरा बना हुआ है, जिससे बचाव कार्य और राहत अभियान फिलहाल चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं।










