लंदन। भारतीय मूल के इतिहासकार सुनील अमृत ने इस वर्ष के प्रतिष्ठित ‘ब्रिटिश एकेडमी बुक प्राइज’ का पुरस्कार अपने नाम किया। उनकी पुस्तक ‘द बर्निंग अर्थ: एन एनवायरनमेंटल हिस्ट्री ऑफ द लास्ट 500 इयर्स’ को इस सम्मान के तहत 25,000 पाउंड की राशि दी गई। यह पुरस्कार दुनियाभर की सर्वश्रेष्ठ गैर-काल्पनिक पुस्तकों को दिया जाता है और इतिहास, समाज और पर्यावरण से जुड़े महत्वपूर्ण योगदान को मान्यता देता है।
सुनील अमृत का जन्म केन्या में हुआ और उनके माता-पिता दक्षिण भारतीय हैं। वे सिंगापुर में पले-बढ़े और इंग्लैंड के कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। वर्तमान में वे अमेरिका के येल विश्वविद्यालय में इतिहास के प्रोफेसर हैं।
बुधवार शाम को लंदन स्थित ब्रिटिश एकेडमी में आयोजित समारोह में निर्णायकों ने उनकी पुस्तक को जलवायु संकट और मानव इतिहास के बीच महत्वपूर्ण संबंधों को उजागर करने वाली कृति बताया। अमृत ने अमेरिका से वीडियो संदेश के माध्यम से कहा,
“कई लोग मुझसे पूछते हैं कि क्या ‘द बर्निंग अर्थ’ निराशाजनक पुस्तक है। इसमें मानव और पर्यावरणीय पीड़ा का विवरण है, लेकिन यह यह भी दिखाती है कि इतिहास में कई ऐसे रास्ते थे जिन्हें हमने अपनाया नहीं। वे विचार, आंदोलन और तकनीकें आज भी हमारे भविष्य के लिए प्रेरणा का स्रोत हो सकती हैं।”
निर्णायक समिति की अध्यक्ष और ब्रिटिश इतिहासकार प्रोफेसर रेबेका एरल ने पुस्तक की सराहना करते हुए इसे मानव इतिहास और पर्यावरणीय परिवर्तन के बीच गहरे संबंधों का अद्भुत विवरण बताया।
इस पुरस्कार के लिए अन्य चयनित पुस्तकों में विलियम डालरिंपल की ‘द गोल्डन रोड: हाउ एंशिएंट इंडिया ट्रांसफॉर्म्ड द वर्ल्ड’ भी शामिल थी, लेकिन निर्णायकों ने अमृत की पुस्तक को श्रेष्ठ माना।
इस जीत के साथ सुनील अमृत ने न केवल इतिहास और पर्यावरण के क्षेत्र में अपनी विशेषज्ञता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित किया है, बल्कि भारत की समृद्ध बौद्धिक विरासत को भी विश्व पटल पर गर्व के साथ पेश किया है।








